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फर्जी वोटरों पर टीएमसी और भाजपा आपस में भिड़े

कोलकाता: मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर हिंसा

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः मंगलवार को कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच भीषण झड़प हुई। हिंसा का मुख्य कारण मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 को भारी संख्या में जमा करने के आरोप हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा अवैध तरीके से बाहरी लोगों के नाम बंगाल की मतदाता सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एजेंटों को पश्चिम बंगाल के सीईओ कार्यालय में हजारों फर्जी फॉर्म 6 आवेदनों के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है। सुश्री बनर्जी ने इसे वोटर हाइजैकिंग करार देते हुए कहा कि यह गैर-निवासी और बाहरी लोगों को बंगाल की चुनावी प्रक्रिया में घुसाने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने चुनाव आयोग से इन असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

विवाद तब और बढ़ गया जब तृणमूल समर्थित बूथ स्तर के अधिकारियों के एक संगठन ने दावा किया कि उन्होंने एक भाजपा कार्यकर्ता को सीईओ कार्यालय में 400 से अधिक फॉर्म 6 आवेदन ले जाते हुए पकड़ा। इसके विरोध में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के बाहर धरना दिया, जहाँ जल्द ही भाजपा समर्थक भी पहुँच गए और दोनों पक्षों में हिंसक झड़प शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात करना पड़ा, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।

इस बीच, सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने इन आरोपों पर अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, यह मेरा काम नहीं है कि मैं हर आने वाले व्यक्ति की जांच करूँ कि वह कार्यालय में क्या ला रहा है। मुझे पूरे राज्य में चुनाव संपन्न कराने हैं या यही सब देखना है? दूसरी ओर, टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें दावा किया गया है कि भाजपा ने बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासियों को बंगाल की मतदाता सूची में शामिल करने के लिए कम से कम 30,000 आवेदन थोक में जमा किए हैं। उन्होंने इसे बंगाल की जनसांख्यिकी बदलने का एक प्रयास बताया है, जिससे आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।