केंद्र सरकार अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत सरकार सूचना और प्रसारण मंत्रालय को सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीधे टेकडाउन नोटिस (हटाने का निर्देश) भेजने का अधिकार देने की योजना बना रही है। आईटी नियम, 2021 के मौजूदा प्रावधानों के तहत, मंत्रालय केवल ऑनलाइन समाचार प्लेटफार्मों को ही ऐसे नोटिस जारी कर सकता था। सोमवार (30 मार्च, 2026) को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में एक मसौदा संशोधन पेश किया गया है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
आईटी मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधन गैर-प्रकाशक उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की गई समाचार और समसामयिक सामग्री पर नियमों की स्पष्टता के लिए है। इसका अर्थ है कि अब आम नागरिक की पोस्ट भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के रडार पर होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी सलाह का पालन न करने पर सोशल मीडिया कंपनियों का सेफ हार्बर अधिकार समाप्त हो सकता है। इससे कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद उपयोगकर्ता की सामग्री के लिए अदालत में कानूनी रूप से उत्तरदायी ठहराई जा सकेंगी।
फरवरी के संशोधन के बाद, टेकडाउन नोटिस के अनुपालन की समय सीमा को 24-36 घंटों से घटाकर मात्र 2-3 घंटे कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप मेटा और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से पोस्ट और अकाउंट हटा रहे हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक सेंसरशिप और नियामक शक्ति का व्यापक विस्तार बताया है। संगठन का आरोप है कि सरकार मद्रास और बॉम्बे हाई कोर्ट के उन आदेशों को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने आईटी नियमों के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी थी।
नियमों में बदलाव के जरिए एक अंतर-विभागीय समिति बनाई जा रही है, जिसके पास शिकायतों और मंत्रालय द्वारा भेजे गए मामलों पर सुनवाई का असीमित अधिकार होगा। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य एआई-जनरेटेड डीपफेक और फर्जी खबरों को रोकना है। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में कई हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स और पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की गई है। द वायर के एनिमेशन, कांग्रेस के एआई-जनरेटेड व्यंग्य वीडियो और सरकार विरोधी पोस्टों को हटाया गया है।
यूट्यूब चैनल मोलिटिक्स का फेसबुक पेज भारत में ब्लॉक कर दिया गया। साथ ही, ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की एक पोस्ट को भी हटाया गया, जबकि उनके द्वारा संदर्भित मूल पोस्ट ऑनलाइन बनी रही। यह प्रस्तावित संशोधन डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकार की नियामक शक्तियों के बीच एक नए विवाद को जन्म दे सकता है।