निगरानी सेवाओँ के लिए टेंडर आवंटन में गड़बड़ी
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए निगरानी सेवाओं के टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में भारत निर्वाचन आयोग के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने आयोग द्वारा एक तकनीकी बोली को खारिज करने की कार्रवाई को मनमाना और दुर्भावनापूर्ण करार दिया है।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ निगरानी सेवा प्रदाता एजेंसी आई-नेट सिक्योर लैब्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने आयोग द्वारा लाइव वेब स्ट्रीमिंग और सीसीटीवी सेवाओं के लिए उनकी तकनीकी बोली को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि आयोग ने टेंडर आवंटन में पारदर्शिता और समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है:
अदालत ने नोट किया कि एक तरफ तो अधिकारियों ने दिल्ली में कार्य करने के अनुभव वाले अन्य बोलीदाताओं को स्वीकार कर लिया, लेकिन याचिकाकर्ता द्वारा अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए इसी तरह के कार्यों के अनुभव को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति राव ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादी अधिकारियों ने याचिकाकर्ता और निजी प्रतिवादियों के साथ अनुभव के मापदंडों पर समान व्यवहार नहीं किया, जो कानून की नजर में गलत है। हालांकि अदालत ने आयोग की प्रक्रिया को मनमाना माना, लेकिन आगामी 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की निकटता (जो 23 और 29 अप्रैल को होने हैं) को देखते हुए टेंडर रद्द करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि चुनाव जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य के लिए टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। ऐसे में वर्तमान अनुबंध को रद्द करने से चुनावी प्रक्रिया बाधित हो सकती है। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वे चाहें तो भविष्य में इस भेदभावपूर्ण व्यवहार के कारण हुए नुकसान के लिए उचित अदालत में मुआवजे का दावा पेश कर सकते हैं। इस फैसले ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रियाओं में तकनीकी निविदाओं के पारदर्शी संचालन और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।