आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः चंडीगढ़ पुलिस ने 83 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल को गिरफ्तार कर लिया है। अबरोल की गिरफ्तारी उस समय हुई जब जांच में यह पुख्ता सबूत मिले कि क्रेस्ट के फंड से हेराफेरी की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा शेल कंपनियों के माध्यम से उनके व्यक्तिगत बैंक खातों और उनके रिश्तेदारों व सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित किया गया था।
इस बहुचर्चित घोटाले की जड़ें पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेन-देन से जुड़ी हैं। मामले की प्राथमिकी 12 मार्च, 2026 को सेक्टर 17 स्थित आर्थिक अपराध शाखा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। यह शिकायत क्रेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा दी गई थी, जिसमें शुरू में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों—रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान—को नामजद किया गया था। जांच के दौरान जैसे-जैसे कड़ियाँ जुड़ती गईं, सरकारी विभाग के भीतर बैठे सफेदपोश अधिकारियों की मिलीभगत सामने आने लगी, जिसके बाद अबरोल पर शिकंजा कसा गया।
पुलिस ने अबरोल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहाँ से उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य अब उस कैश ट्रेल (नकदी के पदचिह्न) को पूरी तरह से ट्रैक करना है जिसका उपयोग सरकारी धन को खुर्द-बुर्द करने के लिए किया गया था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या क्रेस्ट के कुछ अन्य कर्मचारी भी इस संगठित लूट का हिस्सा थे। यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितता का उदाहरण है, बल्कि सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और निगरानी तंत्र की विफलता को भी दर्शाता है।
इससे पहले कोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह खुलासा हुआ था कि आरोपी रिभव ऋषि, जो 2023 से 2025 के बीच आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर 32 शाखा का मैनेजर था, ने सोसाइटी के अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके वहां क्रेस्ट के खाते खुलवाए थे। इन्हीं खातों का उपयोग करके भारी-भरकम राशि को अवैध रूप से निकाला गया। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि यह जालसाजी इतने लंबे समय तक बिना किसी की नजर में आए कैसे चलती रही।