Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ में ड्रॉपआउट बच्चों के लिए 'लइका चिन्हारी' ऐप: घर-घर डिजिटल सर्वे से स्कूलों में दोबारा मि... रायपुर में SBI बैंक मैनेजर से ₹5 लाख की साइबर ठगी: ₹2 करोड़ FD का झांसा देकर फर्जी ईमेल से कराया RTG... भोपाल से चलने वाली बसों में मनमाना किराया: त्योहार पर ट्रेनों में जगह नहीं, ट्रैवल्स कंपनियों ने ₹40... MP में 3.5 लाख NGO, ट्रस्ट और सोसायटियों पर शिकंजा: अब ऑनलाइन होगी कामकाज और ऑडिट की निगरानी, फर्जी ... शिवपुरी में बस ऑपरेटरों की मनमानी: ₹100 का किराया हुआ ₹200, सुरक्षा के लिए अनिवार्य पैनिक बटन गायब मध्य प्रदेश निकाय व पंचायत चुनावों में बड़े बदलाव की तैयारी: अब 1 चरण में मतदान कराने पर विचार धार में भोजशाला मामले को लेकर आधे दिन का बंद: बाजार और दुकानें पूरी तरह बंद, पुलिस बल तैनात MP में प्रमोशन में आरक्षण पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट 3 महीने में करेगा सुनवाई, हाईकोर्ट के आदेश पर... रील के चक्कर में कार पर लगवाए 3400 लिपस्टिक किस: ग्वालियर में 55 लाख व्यूज मिलते ही पुलिस ने काटा ₹5... धार के बदनावर में बड़ा हादसा टला: राजकोट से इंदौर जा रही यात्री बस का टायर फटा, पलटने से 29 यात्रियो...

क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर की गिरफ्तारी हुई

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः चंडीगढ़ पुलिस ने 83 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल को गिरफ्तार कर लिया है। अबरोल की गिरफ्तारी उस समय हुई जब जांच में यह पुख्ता सबूत मिले कि क्रेस्ट के फंड से हेराफेरी की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा शेल कंपनियों के माध्यम से उनके व्यक्तिगत बैंक खातों और उनके रिश्तेदारों व सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित किया गया था।

इस बहुचर्चित घोटाले की जड़ें पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेन-देन से जुड़ी हैं। मामले की प्राथमिकी 12 मार्च, 2026 को सेक्टर 17 स्थित आर्थिक अपराध शाखा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। यह शिकायत क्रेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा दी गई थी, जिसमें शुरू में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों—रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान—को नामजद किया गया था। जांच के दौरान जैसे-जैसे कड़ियाँ जुड़ती गईं, सरकारी विभाग के भीतर बैठे सफेदपोश अधिकारियों की मिलीभगत सामने आने लगी, जिसके बाद अबरोल पर शिकंजा कसा गया।

पुलिस ने अबरोल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहाँ से उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य अब उस कैश ट्रेल (नकदी के पदचिह्न) को पूरी तरह से ट्रैक करना है जिसका उपयोग सरकारी धन को खुर्द-बुर्द करने के लिए किया गया था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या क्रेस्ट के कुछ अन्य कर्मचारी भी इस संगठित लूट का हिस्सा थे। यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितता का उदाहरण है, बल्कि सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और निगरानी तंत्र की विफलता को भी दर्शाता है।

इससे पहले कोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह खुलासा हुआ था कि आरोपी रिभव ऋषि, जो 2023 से 2025 के बीच आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर 32 शाखा का मैनेजर था, ने सोसाइटी के अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके वहां क्रेस्ट के खाते खुलवाए थे। इन्हीं खातों का उपयोग करके भारी-भरकम राशि को अवैध रूप से निकाला गया। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि यह जालसाजी इतने लंबे समय तक बिना किसी की नजर में आए कैसे चलती रही।