भाजपा को इस बार मिली 27 सीटें
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार, 23 मार्च 2026 को चेन्नई स्थित एआईएडीएमके मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में गठबंधन के स्वरूप और सीट-बंटवारे की औपचारिक घोषणा की गई। एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने घोषणा की कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रमुख घटक दल, भारतीय जनता पार्टी को इस बार 27 सीटें आवंटित की गई हैं। यह संख्या 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में सात सीटें अधिक है, जो राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और गठबंधन के भीतर उसकी मजबूत होती स्थिति को दर्शाती है।
दूसरी ओर, डॉ. अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाली पट्टाली मक्कल कात्ची के हिस्से में इस बार 18 विधानसभा सीटें आई हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह संख्या पांच साल पहले की तुलना में पांच सीटें कम है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएमके की सीटों में यह कटौती पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान का परिणाम है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास और उनके पिता एस. रामदास के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण पार्टी अब पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं दिख रही है। इसके अलावा, अन्ना द्रमुक से अलग हुए धड़े, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम को टी.टी.वी. दिनकरन के नेतृत्व में 11 सीटें दी गई हैं।
सीटों के इस आवंटन की घोषणा के समय केंद्रीय मंत्री और भाजपा के चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल भी मौजूद थे। पलानीस्वामी ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अभी कुछ और दलों, जैसे तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), के साथ बातचीत चल रही है और जल्द ही शेष सीटों का विवरण भी साझा किया जाएगा। जब उनसे भाजपा को पीएमके से अधिक सीटें देने के पीछे का कारण पूछा गया, तो पलानीस्वामी ने गठबंधन में किसी भी प्रकार के मतभेद से इनकार करते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण तरीके से लिया गया है। इस दौरान तमिलगा मक्कल मुनेत्र कड़गम के संस्थापक जॉन पांडियन भी उपस्थित थे, हालांकि उनकी पार्टी की सीटों पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।
यदि पिछले प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 2.62% वोट शेयर के साथ चार सीटें जीती थीं, जबकि पीएमके ने 3.8 फीसद वोट शेयर के साथ पांच सीटों पर कब्जा किया था। उस समय भी ये दोनों दल एआईएडीएमके के साथ थे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में स्थिति अलग थी; तब भाजपा ने स्वतंत्र गठबंधन का नेतृत्व किया था और 11.26 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली थी। अब 2026 के इस महामुकाबले में, एआईएडीएमके अपने पुराने साथियों को वापस जोड़कर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है।