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अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद हो रहा युद्ध विस्तार

तमाम देशों में फैले संकट से हजार लोग मारे गये

रियाधः अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व में फैल चुका है। इस युद्ध ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि नागरिक क्षेत्रों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में मरने वालों की संख्या हजारों में पहुँच गई है।

अमेरिकी मानवाधिकार समूह एचआरएएनए के अनुसार, ईरान में अब तक 3,134 लोग मारे जा चुके हैं। चिंताजनक बात यह है कि इनमें 1,369 नागरिक हैं, जिनमें कम से कम 207 बच्चे शामिल हैं। ईरानी आधिकारिक मीडिया और यूएन में उनके राजदूत के आंकड़ों के बीच कुछ विसंगतियां हैं, लेकिन सैन्य रिपोर्टों के अनुसार श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर हुए अमेरिकी हमले में भी 104 सैनिक मारे गए थे।

हिजबुल्लाह-इजरायल युद्ध की आग लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, 2 मार्च से जारी इजरायली हमलों में कम से कम 1,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि की है कि इन मृतकों में 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं। इजरायल की एम्बुलेंस सेवा के अनुसार, ईरानी मिसाइल हमलों में 15 इजरायली नागरिक मारे गए हैं।

इसके अतिरिक्त, दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष में दो इजरायली सैनिक भी मारे गए। कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भी ईरानी मिसाइल हमले में चार फिलिस्तीनी महिलाओं की मौत की खबर है। अमेरिकी सेना ने अपने 13 सेवा सदस्यों के खोने की पुष्टि की है, जिनमें से छह की मौत इराक में एक ईंधन भरने वाले विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से हुई।

संयुक्त अरब अमीरात में 2 सैनिकों सहित 8 लोगों की मौत। कुवैत में 6 लोगों की मौत, जिनमें सेना और आंतरिक मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं। ओमान पर हुए ड्रोन हमलों में 3 लोग मारे गए हैं। सऊदी अरब और बहरीन: क्रमशः 2-2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इराक, सीरिया और फ्रांस इराक में 60 लोग मारे गए हैं, जिनमें अधिकतर शिया पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स के सदस्य हैं।

सीरिया में एक ईरानी मिसाइल के इमारत पर गिरने से 4 लोग मारे गए। वहीं, इराक में आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण दे रहे एक फ्रांसीसी सैनिक की भी ड्रोन हमले में मौत हो गई है। यह युद्ध अब एक मानवीय संकट का रूप ले चुका है, जहाँ नागरिकों और बच्चों की बढ़ती मौतें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।