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चीन के प्रभाव वाले देश मकाऊ में नया कानून लागू

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों की सुनवाई बंद कमरे में होगी

हॉंगकॉंगः चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र मकाऊ की विधायिका ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कानून को मंजूरी दी है। इस नए कानून के तहत, यदि अधिकारियों को लगता है कि सार्वजनिक अदालती कार्यवाही से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है, तो वे उन मामलों की सुनवाई गुप्त रूप से करने का निर्णय ले सकते हैं।

यह कानून मकाऊ की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अधिकारों में व्यापक विस्तार करता है। अब यदि न्यायाधीश और शहर की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति मिलकर यह तय करते हैं कि किसी मामले की सार्वजनिक सुनवाई से देश की संप्रभुता या सुरक्षा को नुकसान पहुँच सकता है, तो अदालती कार्यवाही को जनता और मीडिया के लिए बंद किया जा सकता है।

इस समिति का मुख्य कार्य बीजिंग की केंद्र सरकार की सुरक्षा नीतियों को लागू करना है। पहले इस समिति में मुख्य रूप से सुरक्षा अधिकारी और पुलिस प्रमुख शामिल थे, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाते हुए इसमें सांस्कृतिक मामलों, शिक्षा और युवा विकास विभागों के प्रमुखों को भी शामिल किया गया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मकाऊ में राजनीतिक अभिव्यक्ति पर नियंत्रण कसने की एक और कड़ी है। विशेष रूप से पिछले साल पूर्व लोकतंत्र समर्थक सांसद आउ काम सैन की गिरफ्तारी के बाद से चिंताएँ बढ़ गई हैं। उन पर विदेशी शक्तियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया था, जो 2009 के सुरक्षा कानून (2023 में संशोधित) के तहत पहला सार्वजनिक मामला था।

यद्यपि मकाऊ में हांगकांग की तुलना में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन कभी उतना उग्र नहीं रहा, लेकिन 2019 में हांगकांग में हुए विशाल सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद बीजिंग ने दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा कानूनों को और सख्त कर दिया है। मकाऊ सरकार का कहना है कि यह विधेयक राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की प्रभावी रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह कानून आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के अगले दिन से प्रभावी हो जाएगा। 1999 में पुर्तगाली शासन से चीन को वापस सौंपे जाने के बाद से मकाऊ दुनिया के सबसे बड़े जुआ और गेमिंग केंद्रों में से एक बन चुका है, लेकिन अब इसकी पहचान एक सख्त सुरक्षा घेरे वाले क्षेत्र के रूप में भी मजबूत हो रही है।