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संसद के ऊपरी सदन में एक पायदान ऊपर भाजपा

एनडीए ने 37 में से 21 सीटों पर जीत पायी

  • बिहार में विधायक गायब हो गये विपक्ष के

  • ओडिशा में बीजद की क्रॉस वोटिंग हुई

  • हुड्डा ने किसी तरह अपनी नाक बचायी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए हालिया चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 21 सीटों पर विजय प्राप्त की है, जिससे उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व और अधिक बढ़ गया है। दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के खाते में 13 सीटें आई हैं, जबकि बीजू जनता दल को 1 सीट मिली है। हरियाणा की दो सीटों पर फिलहाल मतगणना रोक दी गई है।

इन 37 सीटों में से 26 सांसद निर्विरोध चुने गए। इनमें भाजपा के सात सदस्य शामिल हैं, जबकि शेष सीटें उसके सहयोगियों—शिवसेना, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), एनसीपी, एआईएडीएमके, पीएमके और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के पास गई हैं। कांग्रेस ने पांच, तृणमूल कांग्रेस ने चार, द्रमुक ने तीन और एनसीपी (शरद पवार) ने एक सीट पर निर्विरोध जीत दर्ज की। जिन 11 सीटों के लिए मतदान हुआ, उनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल थीं।

ओडिशा में हिंसा और हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोपों के बीच हुए चुनावों में भाजपा ने दो सीटें जीतीं, जबकि उसके समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार ने तीसरी सीट पर कब्जा जमाया। बीजद केवल एक सीट बचा पाने में सफल रही। बिहार में एनडीए के पास चार सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बल था। पांचवीं सीट पर ‘इंडिया’ गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा, जबकि उसे एआईएमआईएम और बसपा का समर्थन प्राप्त था। हार का मुख्य कारण कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक द्वारा पाला बदलना रहा।

बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने मतगणना के बाद कहा कि उन्हें बहुमत के लिए छह वोटों की जरूरत थी, जबकि एनडीए को तीन। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उनके साथ विश्वासघात नहीं हुआ होता, तो वे जीत जाते। बिहार से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन भी निर्वाचित हुए हैं।

हरियाणा में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यहाँ भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध के बीच मुकाबला है। हालांकि, निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नंदल के मैदान में होने से समीकरण उलझ गए हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके विधायकों के वोटों को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने गोपनीयता भंग होने के आरोपों को खारिज करते हुए वीडियो फुटेज की जांच की मांग की है।