सरकार द्वारा पूर्ण सतर्कता और सुरक्षा का दावा फेल
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परीक्षार्थी छात्रों में भारी आक्रोश
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फिर से पेपर लीक होने की सूचना
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छात्रों ने कहा यह भविष्य के साथ मजाक
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः नीट यूजी 2026 की परीक्षा रद्द होने के फैसले ने देश भर के छात्रों के बीच गुस्से, चिंता और थकावट की लहर पैदा कर दी है। छात्रों ने इस कदम को हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए भारी नाराजगी जाहिर की है। कई उम्मीदवारों को डर है कि उनकी महीनों की कड़ी मेहनत अब बर्बाद हो गई है। परीक्षा प्रणाली की इस विफलता से छात्र स्तब्ध हैं, क्योंकि वे एक स्थिर और योग्यता-आधारित प्रक्रिया की उम्मीद कर रहे थे।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के प्रमुख अभिषेक सिंह ने इस रद्दीकरण पर बात करते हुए इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हम एक निष्पक्ष परीक्षा चाहते हैं; जांच से खामियों का पता चल जाएगा। सिंह ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक की कथित खबरों और इनपुट के बाद ही परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। उन्होंने दोहराया कि एजेंसी एक पारदर्शी प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है और छात्रों के लिए निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कोटा जैसे कोचिंग हब से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, छात्र अपनी मेहनत बेकार होने का दावा कर रहे हैं। एक अभ्यर्थी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, हर कोई ऐसी खबर को सहन नहीं कर सकता। इस बात की क्या गारंटी है कि दोबारा होने वाली परीक्षा में ऐसी घटना नहीं दोहराई जाएगी? लखनऊ में एक अन्य उम्मीदवार ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए सुझाव दिया कि एनटीए को परीक्षा का माध्यम बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोबारा यात्रा करना और परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है।
सोशल मीडिया पर भी मेडिकल उम्मीदवारों का गुस्सा फूट पड़ा है। छात्रों ने एनटीए के पुराने पोस्टों पर कटाक्ष करते हुए लिखा, यह कोई स्कूल टेस्ट नहीं है। कई छात्रों ने परीक्षा के दोबारा आयोजन को मानसिक प्रताड़ना करार दिया है। जवाबदेही की मांग करते हुए, छात्रों ने अब सुझाव दिया है कि परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित टेस्ट मोड में बदल दिया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
नीट यूजी 2026 का आयोजन भारत के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में, 5,432 से अधिक केंद्रों पर किया गया था, जिसमें लगभग 22.79 लाख पंजीकृत उम्मीदवार शामिल हुए थे। भविष्य की अनिश्चितता और निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों ने इस पूरे विवाद को और गहरा कर दिया है।