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ओडिशा में क्रास वोटिंग से भाजपा को हुआ फायदा

ऐसे विधायकों के खिलाफ कार्रवाई होगीः दास

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में सोमवार को उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया, जब राज्यसभा की चार सीटों के लिए हो रहे मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग करने की पुष्टि हुई। भुवनेश्वर स्थित ओडिशा विधानसभा के कमरा नंबर 54 को मतदान केंद्र बनाया गया था, जहाँ सुबह 9 बजे से ही चुनावी प्रक्रिया अत्यंत कड़ी सुरक्षा और गहमागहमी के बीच शुरू हुई।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान शाम 4 बजे तक चलना था, जिसके तत्काल बाद शाम 5 बजे से मतों की गिनती का कार्य शुरू किया जाना तय किया गया। इस चुनाव की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदन में उपलब्ध 4 सीटों के लिए कुल 5 उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे मुकाबला काफी कड़ा और दिलचस्प हो गया था। विधायकों द्वारा एक-एक कर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बीच ही कांग्रेस खेमे से भितरघात की खबरें आने लगीं।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त दास ने मतदान के दौरान ही मीडिया के सामने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि पार्टी के तीन विधायकों—रमेश जेना, दशरथी गमांग और सोफिया फिरदौस—ने दलीय व्हिप और निर्देशों का उल्लंघन करते हुए विपक्षी खेमे के पक्ष में मतदान (क्रॉस-वोटिंग) किया है। भक्त दास ने इसे पार्टी के साथ विश्वासघात और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान बताया।

इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पीसीसी अध्यक्ष ने घोषणा की कि इन तीनों विधायकों को तत्काल प्रभाव से कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा। अनुशासनहीनता को बर्दाश्त न करने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी केवल निष्कासन तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने के लिए भी कड़े कानूनी कदम उठाएगी।

भक्त दास ने आगे जानकारी दी कि वह आधिकारिक तौर पर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को पत्र लिखकर दल-बदल विरोधी कानून और अन्य तकनीकी आधारों पर इन विधायकों की सदस्यता निरस्त करने की पुरजोर मांग करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्रॉस-वोटिंग का असर न केवल चुनाव के नतीजों पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले समय में ओडिशा विधानसभा के भीतर दलीय समीकरणों में भी बड़े बदलाव ला सकता है।