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केंद्र ने सोनम वांगचुक से रासुका हटाया

लद्दाख में शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम बताया

  • काफी समय से जोधपुर जेल में बंद है

  • पत्नी की याचिका शीर्ष अदालत में

  • अगली सुनवाई 17 मार्च को तय

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय लद्दाख क्षेत्र में शांति बहाल करने और सार्थक बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से लिया गया है।


सोनम वांगचुक जोधपुर जेल से रिहा

जोधपुर: लद्दाख के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार (14 मार्च, 2026) को राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत लगाए गए आरोपों और निवारक हिरासत के आदेश को वापस लेने के बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी। जेल के बाहर आने पर यह साफ नजर आया कि इतने दिनों तक जेल में रहने की वजह से उनकी सेहत गिर गयी है।


पृष्ठभूमि और घटनाक्रम इस मामले की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी। आधिकारिक विवरण के अनुसार, 24 सितंबर 2025 को लेह में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ गई थी। इसके परिणामस्वरूप, लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से वांगचुक के खिलाफ हिरासत का आदेश जारी किया था। इसके बाद, 26 सितंबर 2025 को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कड़े प्रावधानों के तहत हिरासत में ले लिया गया। अपनी हिरासत की अवधि के दौरान, उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।

न्यायिक हस्तक्षेप और वर्तमान स्थिति सरकार ने अपने हालिया आदेश में इस बात को रेखांकित किया है कि वांगचुक पहले ही एनएसए के तहत निवारक हिरासत की अधिकतम अवधि का लगभग आधा समय काट चुके हैं। दूसरी ओर, यह कानूनी लड़ाई देश की शीर्ष अदालत तक पहुँच चुकी है। वांगचुक की पत्नी, डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने पिछले साल अक्टूबर में उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। हालांकि सरकार ने हिरासत वापस ले ली है, लेकिन इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित है।

महत्व लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर वांगचुक लंबे समय से आंदोलनरत रहे हैं। सरकार के इस कदम को केंद्र और लद्दाख के प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़े हुए तनाव को कम करने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। शांति और संवाद की बहाली के लिए उठाया गया यह कदम आने वाले समय में लद्दाख की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।