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सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ी 1.75 करोड़ की मशीन! 4 साल तक खाती रही धूल, अब कबाड़ के भाव बिका ‘करोड़ों का खजाना’

भोपाल: मध्यप्रदेश में जर्जर हो चुके सैकड़ों पुलों की तकनीकी जांच के लिए उपयोग की जाने वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) की इकलौती ब्रिज अंडर स्लंग इंस्पेक्शन यूनिट (MBIU) को नीलाम कर दिया गया है। करीब पौने दो करोड़ रुपए की लागत से खरीदी गई यह जर्मन मशीन बिना तोड़-फोड़ किए पुलों की तकनीकी जांच यानी नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) करने में सक्षम थी। विभाग ने इसे कबाड़ घोषित कर मुंबई की एक कंपनी को बेच दिया।

चार साल से खराब पड़ी थी मशीन

यह मशीन पिछले चार वर्षों से विभाग के ईएंडएम (इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल) विंग में निष्क्रिय पड़ी थी। इसके हाइड्रोलिक पुर्जे खराब हो गए थे और उन्हें ठीक कर पाना विभाग के लिए बड़ी समस्या बन गया था। लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण मशीन धूल खाती रही। करीब एक साल तक चली नीलामी प्रक्रिया और विभागीय अनुमतियों के बाद हाल ही में इसे कबाड़ घोषित कर बेच दिया गया। इसके बाद अब विभाग के पास पुलों की तकनीकी जांच के लिए कोई दूसरी मशीन नहीं बची है।

ट्रायल के तौर पर खरीदी गई थी मशीन

करीब 16 साल पहले भारत सरकार ने जर्मनी की कंपनी ‘मूग’ से ट्रायल के तौर पर यह मशीन 1.75 करोड़ रुपए में खरीदी थी। उस समय सरकार ने कुल तीन मशीनें खरीदी थीं, जिन्हें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को दिया गया था। मध्यप्रदेश में इस मशीन की मदद से 200 से अधिक पुलों का तकनीकी ऑडिट किया गया था। वर्ष 2018 में नर्मदापुरम के सुखतवा पुल की आखिरी बार जांच इसी मशीन से की गई थी। इसके बाद वर्ष 2022 से यह मशीन पूरी तरह बंद पड़ी थी।

राज्य में 253 पुल जर्जर घोषित

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में जर्जर पुलों की स्थिति चिंताजनक है और ऐसी मशीनों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 253 पुल जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इनमें से 46 पुल बेहद खतरनाक श्रेणी में रखे गए हैं। इन पुलों के सरिये तक जंग खा चुके हैं और कई जगहों पर केवल सीमेंट का लेप लगाकर अस्थायी मरम्मत की गई है।

15 मार्च 2026 तक मांगी गई डीपीआर

इसी स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने 15 मार्च 2026 तक सभी जर्जर सड़कों और पुलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।