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खाड़ी क्षेत्र में लगी युद्ध की आग का भारत पर असर

बावन हजार से अधिक लोग भारत लौटे

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः 7 मार्च, 2026 की देर रात भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान ने पश्चिम एशिया में फंसे हजारों भारतीय परिवारों को बड़ी राहत दी है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक सप्ताह (1 से 7 मार्च) के भीतर 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक खाड़ी क्षेत्र से सुरक्षित भारत लौट आए हैं। यह सफलता क्षेत्र के हवाई क्षेत्र के आंशिक रूप से खुलने के बाद मिली है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया और विशेष रूप से खाड़ी देशों में विकसित हो रही तनावपूर्ण स्थितियों पर चौबीसों घंटे नज़र रखे हुए है, ताकि वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए विदेश मंत्रालय ने बताया कि 1 मार्च से 7 मार्च के बीच कुल 52,000 भारतीयों ने वाणिज्यिक और गैर-अनुसूचित  उड़ानों का लाभ उठाकर सुरक्षित यात्रा की। इनमें से 32,107 यात्रियों ने भारतीय विमानन कंपनियों के जरिए स्वदेश वापसी की, जबकि बाकी ने विदेशी एयरलाइंस का सहारा लिया। ये वे लोग थे जो या तो ट्रांजिट (एक देश से दूसरे देश की यात्रा के बीच का ठहराव) में थे या इन देशों की अल्पकालिक यात्रा पर थे और अचानक हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण फंस गए थे। सरकार ने आश्वासन दिया है कि आने वाले दिनों में और अधिक उड़ानों की योजना बनाई गई है ताकि शेष यात्रियों को भी निकाला जा सके।

पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति इस समय अत्यंत नाजुक और अनिश्चित बनी हुई है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर लगातार की जा रही बमबारी और उसके जवाब में तेहरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइली स्थितियों पर किए जा रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र को एक युद्धक्षेत्र में तब्दील कर दिया है।

इस अशांत माहौल में, विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से स्थानीय अधिकारियों के दिशा-निर्देशों और भारतीय मिशनों द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है। मंत्रालय ने दोहराया है कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सहायता तंत्र को मजबूत करने के लिए, खाड़ी क्षेत्र के सभी भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों ने विस्तृत परामर्श जारी किए हैं और चौबीस घंटे हेल्पलाइन स्थापित की हैं। जिन देशों में अभी भी वाणिज्यिक उड़ानें पूरी तरह से ठप हैं, वहां के नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे निकटतम उपलब्ध उड़ान विकल्पों की जानकारी के लिए सीधे दूतावास से संपर्क करें। सरकार लगातार क्षेत्रीय सरकारों के साथ कूटनीतिक संपर्क में है ताकि संकट में फंसे हर भारतीय को आवश्यक सहायता और सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके। 2026 का यह निकासी अभियान भारत की नागरिक-प्रथम विदेश नीति की प्रतिबद्धता को एक बार फिर से सिद्ध करता है।