दोनों ओर से दर्जनों सैनिकों के मारे जाने का दावा
काबुलः दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमावर्ती इलाकों में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, डूरंड रेखा के पास दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई भीषण गोलीबारी में दर्जनों सैनिकों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। यह संघर्ष केवल एक तात्कालिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुराना सीमा विवाद और आतंकवाद के आरोप-प्रत्यारोप छिपे हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का मुख्य विवाद डूरंड रेखा को लेकर है। 2,600 किलोमीटर लंबी यह सीमा ब्रिटिश काल में खींची गई थी, जिसे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान की कोई भी सरकार—चाहे वह पिछली लोकतांत्रिक सरकार हो या वर्तमान तालिबान शासन—इसे आधिकारिक सीमा स्वीकार नहीं करती। तालिबान का कहना है कि यह सीमा पश्तून समुदायों को दो हिस्सों में बांटती है। जब भी पाकिस्तान इस सीमा पर बाड़ लगाने की कोशिश करता है, दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पें शुरू हो जाती हैं।
हालिया संघर्ष के कारण वर्तमान में इस लड़ाई के दो मुख्य कारण हैं। पहला, पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकवादी अफगान धरती का उपयोग करके पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। दूसरा, अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तानी सेना उसकी सीमा के भीतर बस्तियों पर गोलाबारी करती है। हालिया संघर्ष में भारी आर्टिलरी और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण सीमावर्ती गांवों से हजारों नागरिकों को पलायन करना पड़ा है।
यह संघर्ष न केवल दोनों देशों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है, बल्कि इससे व्यापारिक मार्ग (जैसे तोरखम और चमन बॉर्डर) भी बार-बार बंद हो रहे हैं। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि दो परमाणु-सक्षम या अत्यधिक हथियारों से लैस पड़ोसियों के बीच अस्थिरता पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा है।