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तमाम यूरोपीय बलों को आतंकवादी घोषित किया

अमेरिकी धमकी के सामने डटे ईरान का कड़ा कदम

तेहरानः पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में भू-राजनीतिक समीकरणों ने आज उस समय एक खतरनाक मोड़ ले लिया जब ईरान और यूरोपीय देशों के बीच जारी तनाव एक छद्म युद्ध से निकलकर सीधे कूटनीतिक और सैन्य टकराव की दहलीज पर पहुँच गया। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की नौसेना और वायुसेना इकाइयों को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन की श्रेणी में डाल दिया है।

ईरान का यह कठोर निर्णय यूरोपीय संघ द्वारा हाल ही में लगाए गए उन आर्थिक प्रतिबंधों के जवाब में आया है, जिन्होंने ईरान की शिपिंग लाइनों और विमानन सेवाओं को सीधे तौर पर निशाना बनाया था। ईरान इन प्रतिबंधों को अपनी अर्थव्यवस्था पर अघोषित युद्ध मानता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस डिक्री का बचाव करते हुए कहा, यूरोपीय बल मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों में अवैध हस्तक्षेप करने के दोषी हैं।

अब से, क्षेत्र में उनकी किसी भी गतिविधि को ईरानी संप्रभुता के खिलाफ आतंकी कृत्य माना जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि ईरानी सेना अब इन यूरोपीय बलों के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई को आतंकवाद विरोधी अभियान के रूप में परिभाषित कर सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस घोषणा से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में नौवहन की सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है। उल्लेखनीय है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं जलमार्गों, विशेषकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस तनाव की खबर फैलते ही वैश्विक तेल बाजारों में तत्काल तेजी देखी गई है। निवेशकों को डर है कि यदि ईरान ने किसी यूरोपीय मालवाहक जहाज या नौसैनिक बेड़े को रोका, तो यह सीधे सैन्य संघर्ष में तब्दील हो सकता है।

ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने ईरान के इस कदम को हास्यास्पद और अत्यधिक खतरनाक करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। यूरोपीय संघ का कहना है कि ईरान इस तरह के दबाव के हथकंडों का उपयोग करके अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

राजनयिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह केवल शब्दों की जंग है या वाकई खाड़ी क्षेत्र एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है। दोनों पक्षों की ओर से बढ़ती बयानबाजी और सैन्य अलर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि कूटनीतिक माध्यमों से स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो समुद्र में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े क्षेत्रीय विस्फोट का कारण बन सकती है।