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सवालों से कब तक भागेगी सरकार

वर्ष 2026 की बात करें, तो संसद के वर्तमान बजट सत्र के लिए ये शब्द बिल्कुल सटीक बैठते हैं, जिसमें अब तीन सप्ताह का अवकाश होने जा रहा है। निश्चित रूप से, लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी दल केंद्र सरकार को हर दिन जवाबदेह ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। सप्ताह में पांच दिन होने वाले प्रश्नकाल के दौरान, विपक्ष सवाल पूछता है, जनता जवाबदेही की तलाश करती है, जबकि सरकार अक्सर बचती नजर आती है और असंतोषजनक उत्तर देती है।

विपक्षी सांसदों द्वारा पूछे गए सैकड़ों सवालों में से, यहाँ सत्ता पक्ष की ओर दागे गए एक दर्जन प्रमुख सवालों का संकलन प्रस्तुत है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने जनजातीय क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी पर सरकार को घेरा। सरकार के जवाब से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के निवास वाले क्षेत्रों में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान के तहत स्वीकृत सड़क परियोजनाओं में से केवल 23 फीसद ही पूरी हो पाई हैं।

टीएमसी के अभिषेक बनर्जी ने उड़ान योजना के तहत विकसित उन हवाई अड्डों की संख्या मांगी जो वर्तमान में चालू नहीं हैं। सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत विकसित 93 हवाई अड्डों में से 14 गैर-परिचालन हैं, जिनमें से 6 अकेले उत्तर प्रदेश में हैं। इन हवाई अड्डों को 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया था।

के सी वेणुगोपाल ने पीएम इंटर्नशिप योजना के तहत फंड के उपयोग के बारे में पूछा। सरकार ने स्वीकार किया कि इस योजना ने बजट अनुमान 2025-26 में आवंटित धन का केवल 0.5 प्रतिशत ही उपयोग किया है। साथ ही, योजना के पहले दौर में 35 प्रतिशत से भी कम उम्मीदवारों ने प्रस्ताव स्वीकार किए।

समाजवादी पार्टी के सांसदों ने 2014 के बाद से समय सीमा के भीतर पूरी न होने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर सवाल पूछा। सरकार ने उत्तर दिया कि अप्रैल 2014 से शुरू हुई 653 निर्माणाधीन परियोजनाएं ऐसी हैं जो अपनी मूल पूर्णता समय सीमा से आगे निकल गई हैं और अभी तक पूर्ण होने के किसी भी चरण तक नहीं पहुँच पाई हैं। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए बने शी-बॉक्स पोर्टल पर मंत्रालयों के ऑनबोर्डिंग को लेकर सवाल उठाया गया।

सरकार ने बताया कि पोर्टल पर मौजूद सरकारी विभागों और कार्यालयों में से केवल 40 प्रतिशत ने ही अब तक अपनी आंतरिक समिति का विवरण अपडेट किया है। प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर पूछे गए सवाल से पता चला कि 2014 और 2025 के बीच प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर होने वाले खर्च में 500 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है।

जनजातीय कल्याण योजनाओं की कार्यप्रणाली पर सरकार के उत्तर में कहा गया कि देश भर में स्वीकृत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में से 31 फीसद अभी तक चालू नहीं हुए हैं। प्रियंका गांधी ने फिल्म प्रमाणन निर्णयों को उच्च न्यायालयों में चुनौती दिए जाने के आंकड़े मांगे। सरकार ने बताया कि जहां सीबीएफसी द्वारा प्रमाणित फिल्मों की संख्या में 2021-22 और 2025-26 के बीच 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं इन फैसलों को रिवाइजिंग कमेटी में चुनौती देने के मामलों में 120 प्रतिशत और उच्च न्यायालयों में चुनौती देने के मामलों में 400 फीसद की वृद्धि हुई है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद से लाभान्वित होने वाले किसानों के बारे में पूछे जाने पर सरकार ने माना कि केवल 15 प्रतिशत धान किसान और 9.6 प्रतिशत गेहूं किसान ही अपनी उपज खरीद एजेंसियों को बेच पाए। बैंकिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इक्विटी प्रवाह पर सरकार ने जानकारी दी कि 2022-23 और 2024-25 के बीच इस क्षेत्र में एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 87 प्रतिशत की भारी कमी आई है। विदेशों से भारतीयों, विशेषकर छात्रों के निर्वासन पर सरकार ने बताया कि 2021 और 2025 के बीच विदेशी आव्रजन अधिकारियों द्वारा 453 भारतीय छात्रों को वापस भेज दिया गया है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत नामांकित उम्मीदवारों पर पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि इस योजना के तहत नामांकित प्रत्येक 5 में से 2 से अधिक उम्मीदवार प्रमाणित नहीं हो सके। जब संसद सत्र में होती है, तो विपक्ष सरकार को जवाबदेह ठहराने की हर संभव कोशिश करता है। सवाल यह है कि सरकार क्या कर रही है? इसके बीच ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का वह बयान भी सामने आ जाता है, जिसमें राहुल गांधी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। मूल सवालों से भागती यह सरकार हर बार किसी दूसरे मुद्दे पर देश का ध्यान भटकाने का प्रयास कर आखिर क्या हासिल करना चाहती है। अब तो चुनावी वादों को पूरा करने और जनता को बताने का समय है।