Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Gwalior Crime News: हस्तिनापुर में नवविवाहित जोड़े ने की आत्महत्या; एक ही फंदे पर लटके मिले पति-पत्न... Women's T20 World Cup 2026: पाकिस्तान महिला टीम की शर्मनाक हरकत; अहम मुकाबले से पहले कोच वहाब रियाज ... Anubhav Sinha & Taapsee Pannu: तापसी पन्नू के साथ अनुभव सिन्हा की ब्लॉकबस्टर जोड़ी; जानें निर्देशक क... US-Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच ट्रंप के बयान से बवाल; ईरानी प्रतिन... Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे लुढ़का; जानें क्या है बाजार का ताजा हाल Zoho in China: चीन में जोहो की 25 साल की लंबी यात्रा; श्रीधर वेम्बू की कंपनी का वहां कैसे बढ़ा दबदबा? Ardra Nakshatra 2026: सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश; मानसून की आहट और कृषि परंपराओं में इसका म... Mango Sandesh Sandwich Recipe: आम के सीजन में घर पर बनाएं क्रीमी बंगाली मैंगो संदेश सैंडविच, जानें आ... Maharashtra MLC Election Results: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में 'महायुति' का दबदबा; 17 में से 16 ... Prayagraj Rape Case: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन; विधायक की फटकार के बाद आरोपी ...

प्रदूषण और पर्यावरण का खतरा सबसे एकांत इलाके में

अंटार्कटिका का एकमात्र मूल निवासी कीट भी चपेट में

  • अत्यंत कठिन परिस्थिति में जिंदा रहता है

  • चावल के दाने जितना आकार है इसका

  • प्रयोगशाला परीक्षण और सूक्ष्म प्रभाव

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दुनिया के सबसे दुर्गम और एकांत क्षेत्रों में से एक माने जाने वाले अंटार्कटिका से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी के मार्टिन-गैटन कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, फूड एंड एनवायरनमेंट के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया है कि अंटार्कटिका का एकमात्र मूल निवासी कीट, बेल्जिका अंटार्कटिका अब माइक्रोप्लास्टिक्स का सेवन कर रहा है।

अपनी तरह का पहला शोध है, जो यह बताता है कि माइक्रोप्लास्टिक्स अंटार्कटिक कीटों को कैसे प्रभावित कर रहे हैं। यह पहली बार है जब जंगली कीटों के शरीर के भीतर प्लास्टिक के कणों की पुष्टि हुई है। इस परियोजना की शुरुआत 2020 में जैक डेविलिन द्वारा की गई थी, जो उस समय पीएचडी छात्र थे। एक डॉक्यूमेंट्री से प्रेरित होकर उन्होंने यह शोध शुरू किया कि क्या अंटार्कटिका जैसी दुर्लभ जगहें भी प्लास्टिक प्रदूषण से सुरक्षित हैं।

इंसानी दिमाग के भीतर भी माइक्रो प्लास्टिक

बेल्जिका अंटार्कटिका एक बिना काटने वाली मिज (एक प्रकार की छोटी मक्खी) है, जिसका आकार चावल के दाने के बराबर होता है। यह पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे दक्षिणी कीट है और अंटार्कटिका की एकमात्र मूल निवासी कीट प्रजाति है। इसके लार्वा अंटार्कटिक प्रायद्वीप के किनारे काई और शैवाल की नम परतों में रहते हैं। कुछ स्थानों पर इनकी संख्या प्रति वर्ग मीटर 40,000 तक हो सकती है। ये कीट मृत पौधों को खाकर पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं और वहां के नाजुक मृदा पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखते हैं।

डेविलिन के अनुसार, ये कीट पॉली-एक्सट्रीमफाइल्स हैं, यानी ये अत्यधिक ठंड, निर्जलीकरण, उच्च लवणता और तीव्र यूवी विकिरण को सहन करने की क्षमता रखते हैं। शोध का मुख्य प्रश्न यह था कि क्या इनकी यह मजबूती इन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स जैसे नए खतरों से बचा पाएगी या यह इन्हें और अधिक संवेदनशील बना देगी।

शोधकर्ताओं ने नियंत्रित प्रयोगों के माध्यम से यह समझने की कोशिश की कि प्लास्टिक के संपर्क में आने से इन कीटों पर क्या प्रभाव पड़ता है। शुरुआती नतीजे हैरान करने वाले थे। अत्यधिक प्लास्टिक सांद्रता के बावजूद, कीटों की उत्तरजीविता दर में गिरावट नहीं आई और न ही उनके बुनियादी चयापचय में कोई बदलाव दिखा।

हालांकि, गहरे विश्लेषण से एक छिपा हुआ प्रभाव सामने आया। जिन लार्वाओं को माइक्रोप्लास्टिक्स के उच्च स्तर के संपर्क में रखा गया, उनके वसा भंडार में कमी देखी गई। अंटार्कटिका की कठोर जलवायु में ऊर्जा संचयन के लिए वसा अत्यंत आवश्यक है। डेविलिन का मानना है कि ठंडी स्थितियों में धीमी फीडिंग और प्राकृतिक मिट्टी की जटिलता प्लास्टिक अंतर्ग्रहण को सीमित कर सकती है, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव चिंताजनक हो सकते हैं।

परियोजना के दूसरे चरण में, टीम ने 2023 में अंटार्कटिक प्रायद्वीप के 13 द्वीपों के 20 स्थानों से जंगली लार्वा एकत्र किए। उन्नत इमेजिंग टूल्स और रासायनिक फिंगरप्रिंट तकनीक का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने 5 मिलीमीटर के लार्वा के पेट की जांच की। विश्लेषण किए गए 40 लार्वा में से दो में माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े पाए गए।

भले ही दो टुकड़े कम लगें, लेकिन डेविलिन इसे एक शुरुआती चेतावनी मानते हैं। उनका कहना है कि अंटार्कटिका में वर्तमान में प्लास्टिक का स्तर दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में कम है, लेकिन यह स्पष्ट है कि प्लास्टिक अब वहां के सिस्टम में प्रवेश कर चुका है और कीटों के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर रहा है। यह खोज इस बात पर मुहर लगाती है कि प्लास्टिक प्रदूषण कितना व्यापक हो चुका है। जहाँ कोई पेड़ नहीं है और नाममात्र के पौधे हैं, वहां रहने वाले नन्हे कीट के पेट में प्लास्टिक का मिलना यह दर्शाता है कि दुनिया का कोई भी कोना अब सुरक्षित नहीं है।

#Microplastics #Antarctica #EnvironmentalScience #BelgicaAntarctica #PlasticPollution #माइक्रोप्लास्टिक #अंटार्कटिका #पर्यावरणप्रदूषण #जीवविज्ञान #प्रदूषणकीमार