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कराची की इमारत में सिलेंडर ब्लास्ट से हाहाकार

पाकिस्तान के आर्थिक केंद्र में विस्फोट से कई लोग मरे

कराचीः पाकिस्तान के आर्थिक केंद्र और सबसे बड़े शहर कराची के लियाकताबाद इलाके से आज एक बेहद हृदयविदारक समाचार सामने आया है। शाम के समय, जब लोग अपने घरों में दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, एक भीषण गैस सिलेंडर विस्फोट ने पूरी बस्ती को दहला दिया। लियाकताबाद की एक संकरी और घनी आबादी वाली गली में स्थित तीन मंजिला रिहायशी इमारत इस धमाके की तीव्रता को झेल नहीं पाई और ताश के पत्तों की तरह पूरी तरह जमींदोज हो गई।

स्थानीय राहत एवं बचाव कर्मियों के अनुसार, मलबे से अब तक 16 शव निकाले जा चुके हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि मृतकों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है, जो विस्फोट के समय घर के भीतर मौजूद थे। धमाके की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि न केवल मुख्य इमारत ढह गई, बल्कि आसपास की दो अन्य बहुमंजिला इमारतों में भी गंभीर दरारें आ गई हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से इन पड़ोसी इमारतों को तुरंत खाली कराकर ‘असुरक्षित’ घोषित कर दिया है।

कराची के लियाकताबाद जैसे पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों की संकरी गलियां अब राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही हैं। भारी मशीनरी और क्रेन का घटनास्थल तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया है, जिसके कारण बचाव कर्मी हाथों और छोटे उपकरणों की मदद से मलबा हटाने को मजबूर हैं।

रात के अंधेरे ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ने का अंदेशा बना हुआ है। कराची के मेयर ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों, विशेषकर जिन्ना पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सेंटर और सिविल अस्पताल, में ‘रेड अलर्ट’ घोषित कर दिया है ताकि घायलों को तत्काल उपचार मिल सके।

शुरुआती जांच रिपोर्टों ने एक कड़वी सच्चाई उजागर की है। पता चला है कि इस रिहायशी इमारत के भूतल पर एक अवैध गैस सिलेंडर रिफिलिंग की दुकान संचालित हो रही थी। घनी आबादी के बीच बिना किसी सुरक्षा मानक के एलपीजी गैस का यह अवैध कारोबार ही इस त्रासदी का मुख्य कारण बना।

सिंध सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक मुआवजे का ऐलान किया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अवैध दुकानों की शिकायत बार-बार करने के बावजूद पुलिस और नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह घटना पाकिस्तान के बड़े शहरों में अनियंत्रित शहरीकरण, जर्जर इमारतों और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का एक और प्रमाण है।

यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और शहरी नियोजन के अभाव का परिणाम है। अब देखना यह होगा कि क्या सिंध सरकार इस घटना से सबक लेकर कराची की गलियों में चल रहे अन्य ‘मौत के अड्डों’ के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।