Breaking News in Hindi

पीएम मोदी जनहित में काम कर रहे हैः एब्बा बुश

इंडिया ए आई समिट में विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी

  • भारत से एक नया वैश्विक नेतृत्व

  • भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी

  • मोदी की सोच में विश्व कल्याण

नईदिल्लीः स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री एब्बा बुश ने भारत की तकनीकी प्रगति और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर प्रशंसा की है। एक हालिया वैश्विक मंच पर बोलते हुए बुश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का एआई की दिशा में उठाया गया हर कदम केवल व्यापार या आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ग्रेटर गुड यानी वैश्विक और सामाजिक कल्याण की भावना से प्रेरित है। उनका मानना है कि भारत जिस तरह से तकनीक का लोकतंत्रीकरण कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।

एब्बा बुश ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने डिजिटल बुनियादी ढांचे के माध्यम से यह साबित कर दिया है कि तकनीक का सही उपयोग कैसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने पीएम मोदी के सभी के लिए एआई के नारे का जिक्र करते हुए कहा कि भारत एआई का उपयोग स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार के लिए कर रहा है। स्वीडन की नेता के अनुसार, भारत का यह दृष्टिकोण अन्य देशों को यह सिखाता है कि तकनीक को डर या चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि मानवता की समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जाना चाहिए।

इस प्रशंसा के पीछे भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते तकनीकी और रणनीतिक संबंध भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं। दोनों देश नवाचार और ग्रीन टेक्नोलॉजी में गहरी साझेदारी कर रहे हैं। एब्बा बुश ने उल्लेख किया कि स्वीडन और यूरोपीय संघ, भारत के साथ मिलकर एआई के नैतिक उपयोग और डेटा सुरक्षा पर काम करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत के पास जो विशाल डेटा सेट और प्रतिभाशाली कार्यबल है, वह वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य को आकार देने की क्षमता रखता है।

स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि पीएम मोदी का नेतृत्व भारत को केवल एक आईटी हब से आगे ले जाकर एक वैश्विक समाधान प्रदाता बना रहा है। उन्होंने कहा कि जब तकनीक को मानवीय मूल्यों और करुणा के साथ जोड़ा जाता है, जैसा कि भारत कर रहा है, तो वह वास्तव में दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया एआई के नियमन और इसके प्रभावों को लेकर चर्चा कर रही है, और भारत इसमें एक संतुलित और मानवीय चेहरा पेश कर रहा है।