Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Dehradun News: बैरागीवाला गांव में युवक की हत्या के बाद भारी तनाव; गुस्साए लोगों का हंगामा, पुलिस बल... Drone Post Delivery in Himachal: हिमाचल में ड्रोन से पहुंचेगी डाक; मंडी-रेहरधार मार्ग पर सफल ट्रायल,... Greater Noida News: जिम में वर्कआउट के बाद 20 वर्षीय युवक की मौत; हार्ट अटैक की आशंका से मचा हड़कंप Maharashtra Politics: शरद पवार को रामदास आठवले का बड़ा ऑफर; कांग्रेस के बजाय NDA में आने की दी सलाह Govindpuri Fire Case: दिल्ली अग्निकांड कोई हादसा नहीं, बल्कि खौफनाक साजिश; 3 की मौत के मामले में 4 ग... TMC Internal Conflict: सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ने ममता बनर्जी और महुआ मोइत्रा को भेजा कानू... Noida Road Accident: नोएडा महामाया फ्लाईओवर के पास तेज रफ्तार स्लीपर बस पलटी; 14 यात्री घायल Weather Update: दिल्ली-एनसीआर में फिर सताएगी भीषण गर्मी; 6 दिनों तक बारिश के कोई आसार नहीं सिर्फ खाने के काम ही नहीं आयेगा चावल का सफेद दाना, देखें वीडियो राहुल गांधी का रुख भाजपा को मदद पहुंचा रहाः विजयन

अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता वैचारिक मतभेद

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2026 में साफ नजर आ रही है दरार

म्यूनिखः म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के शुरुआती सत्र में शुक्रवार को वैश्विक नेताओं ने एक ऐसी बात पर सहमति जताई जिसने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अमेरिकी नेतृत्व वाली नियम-आधारित विश्व व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है। जहाँ एक ओर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने इसे अतीत की बात बताया, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी स्वीकार किया कि पुरानी दुनिया अब जा चुकी है। हालांकि, इस एक बिंदु पर सहमति के बावजूद, भविष्य की दिशा को लेकर वाशिंगटन और उसके नाटो सहयोगियों के बीच गहरा मतभेद और कड़वाहट साफ देखी गई।

मई 2025 में कार्यभार संभालने वाले जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अपने उद्घाटन भाषण में बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि 1945 के बाद का वैश्विक समझौता अब अस्तित्व में नहीं है और अमेरिका अब अकेले अपनी शक्ति के बल पर दुनिया का नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं रह गया है। मर्ज़ ने चेतावनी दी कि महाशक्तियों के प्रतिद्वंद्विता वाले इस युग में, संयुक्त राज्य अमेरिका भी इतना शक्तिशाली नहीं है कि वह अकेले आगे बढ़ सके।

मर्ज़ ने विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन की उन नीतियों की आलोचना की जो टैरिफ, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक युद्ध पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप मैगा आंदोलन के सांस्कृतिक मूल्यों को साझा नहीं करता और मानवाधिकारों व संवैधानिक गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ट्रम्प प्रशासन द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर निकलने और पेरिस जलवायु समझौते को दरकिनार करने के फैसलों पर भी सवाल उठाए।

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक चांसलर मर्ज़ का वह खुलासा था, जिसमें उन्होंने बताया कि जर्मनी और फ्रांस के बीच यूरोपीय परमाणु प्रतिरोध को लेकर गोपनीय बातचीत शुरू हो चुकी है। अब तक जर्मनी अमेरिकी परमाणु सुरक्षा पर निर्भर रहा है, लेकिन वाशिंगटन की अनिश्चित नीतियों के कारण अब यूरोप अपनी स्वतंत्र सुरक्षा क्षमता विकसित करना चाहता है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि यूरोप को एक भू-राजनीतिक शक्ति बनना होगा। मैक्रों ने जोर देकर कहा कि रूस के बढ़ते आक्रामक रुख को देखते हुए यूरोप को अपनी रक्षा और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता लानी होगी। उन्होंने ट्रम्प द्वारा यूक्रेन में बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन तो किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यह शांति न्यायपूर्ण और स्थायी होनी चाहिए, न कि रूसी मांगों के सामने आत्मसमर्पण।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने म्यूनिख रवाना होने से पहले ही यह संकेत दे दिया था कि अमेरिका भी पुरानी व्यवस्था को मृत मान चुका है। उन्होंने कहा, हम भू-राजनीति के एक नए युग में जी रहे हैं। यह हम सभी से अपनी भूमिकाओं की फिर से समीक्षा करने की मांग करेगा। हालांकि, शनिवार को अपने संबोधन में रुबियो ने थोड़ा नरम रुख अपनाते हुए यूरोप को आश्वस्त करने की कोशिश की कि अमेरिका उसे अपना सभ्यतागत साथी मानता है और अलग होने का कोई इरादा नहीं रखता।

रुबियो ने यह भी कहा कि पुरानी दुनिया अब नहीं रही, सच तो यह है कि जिस दुनिया में मैं पला-बढ़ा था, वह गायब हो चुकी है। उन्होंने यूरोपीय देशों से आह्वान किया कि वे अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी उठाएं और आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि अमेरिका की प्राथमिकताएं अब बदल रही हैं।