Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mahashivratri 2026: विदेशी फूलों से महका बाबा महाकाल का दरबार, 44 घंटे तक लगातार होंगे दर्शन; जानें ... Tantrik Kamruddin Case: 8 लोगों का कातिल तांत्रिक कमरुद्दीन, अवैध संबंध और तंत्र-मंत्र के खौफनाक खेल... Delhi News: दिल्ली में नकली और घटिया दवाओं पर बड़ा एक्शन, स्वास्थ्य मंत्री ने 10 फर्मों के खिलाफ दिए... किसान नेताओं से मिले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सीरिया से इराक भेजा गया आतंकवादियों को कई छोटे द्वीपों पर दरार आने की जानकारी मिली है नाइजीरिया में तेल पाइपलाइन विस्फोट की त्रासदी सैलानियों को जाली टिकट रैकेट का भंडाफोड़ राजपथ पर प्रधानमंत्री के विमान की इमर्जेंसी लैंडिंग सफल Mumbai Mayor Action: मुंबई की मेयर बनते ही एक्शन में ऋतु तावड़े, अवैध बांग्लादेशियों और फर्जी दस्ताव...

पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ.. .. ..

सत्ता के गलियारों में आजकल एक पुराना फिल्मी नगमा गूँज रहा है पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ। वैसे तो यह गाना 1968 की फिल्म शिखर का है, जहाँ आशा पारेख अपनी अदाओं से राज़ छुपाने की इल्तजा कर रही थीं, लेकिन आज के दौर में यह गीत भारतीय राजनीति के शिखर पर बैठे नायकों की मजबूरी बन गया है। फर्क बस इतना है कि तब पर्दे के पीछे हुस्न के जलवे थे, और आज पर्दे के पीछे मित्रों के हलवे हैं।

पर्दा करने की कोशिश तो पूरी थी, चाक-चौबंद इंतज़ाम किए गए थे, इवेंट मैनेजमेंट की भारी-भरकम फौज तैनात थी, लेकिन कम्बख्त ये डोनाल्ड ट्रंप हैं कि मानते ही नहीं। ट्रंप साहब का मिजाज उस बिन बुलाए मेहमान जैसा है जो शादी के घर में आकर सबसे सामने दूल्हे की पुरानी उधारी का जिक्र कर दे। ट्रंप ने हाल ही में यह कहकर सबको सन्न कर दिया कि, मैं अपने मित्र नरेंद्र मोदी का राजनीतिक करियर खराब नहीं करना चाहता। अब भला बताइए, ऐसी दोस्ती से तो दुश्मनी भली! यह तो वही बात हुई कि कोई सरेआम आपके कंधे पर हाथ रखकर कहे—घबराओ मत भाई, मैं किसी को नहीं बताऊंगा कि कल रात तुम कहाँ थे। ट्रंप के इस दोस्ताना खुलासे ने उस पर्दे में इतने छेद कर दिए हैं कि अब आर-पार साफ दिखने लगा है।

उधर, सात समंदर पार अमेरिकी अदालत में अडाणी नाम की फाइल की धूल झाड़ी जा रही है। फाइल क्या खुली, मानो कोई पुरानी तिजोरी खुल गई हो जिसकी चाबी खो गई थी। अभी अडाणी मामले की गाड़ी गियर बदल ही रही थी कि ट्रंप साहब ने एक और धमाका कर दिया। उन्होंने अंबानी साहब को वेनेजुएला से तेल खरीदने का ग्रीन सिग्नल दे दिया। मुद्दों पर सरकार परम पावन सफेद चादर डालना चाह रही थी, ट्रंप ने अपनी बेबाकी के झटके से उस चादर को तौलिए जितना छोटा कर दिया है।

विचित्र स्थिति तो यह है कि खुद मोदी जी ने ही पिछले दस सालों में ऐसा वन-मैन शो वाला माहौल तैयार कर दिया है कि अब भाजपा के बाकी नेताओं की बातों का वजन उतना ही रह गया है जितना चुनावी वादों का होता है। पार्टी के दूसरे सिपहसालार अगर दलील देते भी हैं, तो जनता उसे बैकग्राउंड म्यूजिक समझकर अनसुना कर देती है। हाल ही में हरदीप सिंह पुरी साहब मैदान में उतरे थे। वह आए तो थे सरकार का बचाव करने, लेकिन बचाव के चक्कर में ऐसा गोल कर बैठे कि टीम अपनी ही हार पर रोने लगी।

पुरी साहब ने अपनी सफाई में कुछ ऐसी बातें कह दीं जिससे डिजिटल इंडिया का वह ढोल फट गया जिसे पीट-पीटकर दुनिया को बहरा कर दिया गया था। उनके मुताबिक, जिस डिजिटल सुरक्षा और डेटा की हम कसम खाते थे, उसकी जानकारी अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन को पहले से ही थी। पुरी जी खुद को अनजान और बेचारा साबित करने की जुगत में पूरी सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर गए।

कहते हैं कि जब समय खराब होता है, तो सावधानी से पकड़ी गई रस्सी भी सांप बन जाती है। यहाँ तो रस्सी भी नहीं, किताब बम बन गई है। जनरल नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक की चंद पंक्तियों ने वह जलजला पैदा किया है कि दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान में कंपकंपी छूट रही है। आलम यह है कि मोदी जी अब संसद से ही नदारद हैं। शायद उन्हें डर है कि अगर वह सदन में गए, तो विपक्षी कड़वे सवाल पूछेंगे। यहीं पर हसरत जयपुरी के वे शब्द याद आते हैं जो आज की सत्ता पर बिल्कुल फिट बैठते हैं:

पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जाएगा, अल्लाह मेरी तौबा!

इस पूरी स्क्रिप्ट का विलेन या ट्विस्ट वह किताब है जिसके बारे में चर्चा के बिना यह किस्सा अधूरा है। जनरल नरवणे की किताब में ऐसा क्या है कि उसे छपने से पहले ही नजरबंद कर दिया गया? सवाल यह है कि क्या नरवणे की चेतावनियों के बावजूद सरकार धृतराष्ट्र बनी रही? क्या फैसले लेने में देरी की गई या जानबूझकर किनारा किया गया? किताब बाहर कैसे आई, यह गौण है; मुख्य बात यह है कि किताब के अंदर जो सच है, वह सरकार के राष्ट्रवाद वाले पर्दे को तार-तार कर रहा है।

आज की राजनीति में हुस्न की जगह सत्ता है और नकाब की जगह पीआर । लेकिन ट्रंप जैसे अनप्रेडिक्टेबल दोस्त और पुरानी फाइलों के जिन्न इस नकाब को नोच रहे हैं। अब देखना यह है कि अल्लाह मेरी तौबा करने की बारी कब आती है। फिलहाल तो सरकार इसी कोशिश में है कि—पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ!