इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच लगातार बढ़ता संघर्ष
तेल अवीवः लेबनान और इजरायल के बीच दशकों से चला आ रहा सीमा विवाद पिछले 8 घंटों में एक अत्यंत खतरनाक और हिंसक मोड़ ले चुका है। सीमावर्ती क्षेत्रों में युद्ध की आहट अब साफ सुनाई दे रही है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है। दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में इजरायली वायुसेना ने पिछले कुछ घंटों में भीषण बमबारी की है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य हिज्बुल्ला के उन बुनियादी ढांचों को नष्ट करना है जो इजरायल के नागरिक क्षेत्रों के लिए सीधा खतरा बने हुए थे। इजरायली खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए इन हमलों में मुख्य रूप से उन ठिकानों को निशाना बनाया गया है जहाँ से इजरायली शहरों की ओर मिसाइलें दागी जा रही थीं। हिज्बुल्ला के भूमिगत हथियार गोदाम और गोला-बारूद के भंडारण केंद्र। परिचालन को नियंत्रित करने वाले सामरिक ठिकाने।
इजरायली हमलों के जवाब में हिज्बुल्ला ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए उत्तरी इजरायल के गैलील क्षेत्र में दर्जनों रॉकेट दागे हैं। इन हमलों के कारण उत्तरी इजरायल के शहरों में सायरन की आवाजें गूंज रही हैं और नागरिकों को सुरक्षित बंकरों में शरण लेने के निर्देश दिए गए हैं। हिज्बुल्ला ने इस जवाबी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता की रक्षा करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि बमबारी नहीं रुकी, तो वे अपने हमलों का दायरा और बढ़ा देंगे।
सीमा के दोनों ओर मानवीय स्थिति गंभीर होती जा रही है। स्थानीय सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती गांवों से हजारों नागरिक अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। दूसरी ओर, उत्तरी इजरायल में भी जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है, जहाँ स्कूल और व्यापारिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं।
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल ने वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक कड़ा बयान जारी किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि वर्तमान में जारी यह छिटपुट गोलाबारी किसी भी क्षण एक पूर्ण युद्ध का रूप ले सकती है। शांति बल ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ब्लू लाइन का सम्मान करने की अपील की है।
इजरायली रक्षा बलों के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य रूप से किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय देश, इस स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और फैला, तो इसमें क्षेत्र के अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।