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सुप्रीम कोर्ट परिसर को भी दागदार बना दिया रसिकों ने

अब पान और गुटखा थूकने पर पाबंदी लगी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने परिसर के भीतर स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखने की दिशा में एक कड़ा कदम उठाया है। 11 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट प्रशासन द्वारा जारी एक आधिकारिक सर्कुलर में परिसर के भीतर पान मसाला, गुटखा या तंबाकू चबाने और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों को सख्त चेतावनी दी गई है।

यह कदम विशेष रूप से कोर्ट परिसर के कोनों, वाशबेसिन और पीने के पानी के क्षेत्रों में गंदगी को रोकने के लिए उठाया गया है। अदालत की प्रशासनिक शाखा द्वारा जारी इस संचार में कहा गया है कि पिछले कुछ समय में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जहाँ भवन का उपयोग करने वाले कुछ लोग पान मसाला और तंबाकू खाकर उन्हें वाशबेसिन और दीवार के कोनों में थूक देते हैं। इस बुरी आदत के कारण न केवल दृश्य गंदगी फैलती है, बल्कि इसके कई गंभीर परिणाम भी सामने आए हैं। थूक के अवशेषों के जमा होने से वाशबेसिन और ड्रेनेज पाइपों में रुकावट पैदा हो रही है।

सार्वजनिक स्थानों पर थूकना संक्रमण फैलाने का एक बड़ा जरिया है, जिससे परिसर में आने वाले अन्य लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा होता है। यह आदत परिसर का उपयोग करने वाले वकीलों, कर्मचारियों और वादियों के लिए असुविधा का कारण बनती है और संस्था की गरिमा को ठेस पहुँचाती है।

सर्कुलर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है, यह देखा गया है कि भवन के कुछ उपयोगकर्ता पान मसाला/गुटखा, तंबाकू आदि चबाने और इसके अवशेषों को दीवार के कोनों, वाशबेसिन, पीने के पानी की सुविधाओं आदि में थूकने के आदी हैं। यह आदत जल अवरोध और संक्रमण के जोखिम का परिणाम देती है। इसलिए, सभी संबंधितों को यह निर्देश दिया जाता है कि वे परिसर में ऐसी गतिविधियों में शामिल न हों और परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने में सहयोग करें।

यह आदेश न केवल अदालत के कर्मचारियों पर बल्कि वहां आने वाले हर आगंतुक और पेशेवर पर लागू होता है। प्रशासन का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट को एक मॉडल सार्वजनिक संस्थान के रूप में प्रस्तुत करना है जहाँ स्वच्छता के वैश्विक मानकों का पालन किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस चेतावनी के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो प्रशासन भविष्य में आर्थिक दंड या अन्य दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान भी कर सकता है।