Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
FIFA World Cup 2026: मेसी बनाम एम्बाप्पे; गोल्डन बूट और सबसे ज्यादा गोल के रिकॉर्ड के लिए सीधी टक्कर Dry Fruits in Summer: गर्मी में ड्राई फ्रूट्स खाने का सही तरीका; जानें किन सूखे मेवों से बचें और क्य... WhatsApp New Features: व्हाट्सऐप पर जल्द आएंगे ये कमाल के फीचर्स; स्कैम अलर्ट से लेकर मैसेज शेड्यूलि... Weather Update Today: दिल्ली में फिर बढ़ेगा गर्मी का सितम, जानिए देश के बाकी राज्यों में मॉनसून और बा... उन्नीस दिनों तक लगातार चले रेडियो विस्फोट से अचंभा अब मास्कधारी सैनिकों की तैनाती कर दी गयी क्यूबा क्रांति के अंतिम कमांडर रामिरो वाल्डेस नहीं रहे लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप संबंधी ट्रंप के बयान का खंडन लिथुआनिया ब्रिगेड को मजबूत करेगा जर्मनी यूक्रेन पर नये सिरे से दबाव बढ़ा रही है रूसी सेना

पूर्व सेना प्रमुख की किताब के झटके से सहमी है सरकार

अब सेवानिवृत्ति के बाद बीस साल तक रोक

  • सदन के बाहर किताब का प्रदर्शन

  • कुछ वाक्यों से परेशानी में सरकार

  • पीडीएफ कॉपी का वितरण हुआ है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर उपजे विवाद के बीच केंद्र सरकार एक बड़े नीतिगत बदलाव पर विचार कर रही है। खबरों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के लिए किताबें लिखने और प्रकाशित करने के संबंध में नए कड़े दिशानिर्देश ला सकती है, जिसमें 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड (अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि) शामिल हो सकता है।

यह पूरा विवाद जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के उन हिस्सों से शुरू हुआ, जिनमें अगस्त 2020 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध (पूर्वी लद्दाख) का जिक्र है। पांडुलिपि के कथित अंशों में सुझाव दिया गया है कि कैलाश रेंज पर चीनी कार्रवाई के दौरान सेना को तत्काल कोई स्पष्ट राजनीतिक निर्देश नहीं मिला था। सरकार ने इन दावों को गंभीरता से लिया है।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब का जिक्र किए जाने और सोशल मीडिया पर इसकी कथित पीडीएफ वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया है। लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा उल्लेख किये जाने के बाद राजनाथ सिंह और अमित शाह ने किताब के अस्तित्व में नहीं होने की बात कही थी। जिसके बाद अगले दिन राहुल गांधी ने इस किताब का संसद के बाहर न सिर्फ सार्वजनिक प्रदर्शन किया बल्कि कहा कि यदि प्रधानमंत्री सदन में आते हैं तो वह उन्हें यह किताब भेंट करेंगे। उसके बाद से नरेंद्र मोदी सदन से अनुपस्थित हैं।

वर्तमान में, सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए कोई एक संकलित कानून नहीं है, हालांकि वे आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत आजीवन बंधे होते हैं। नए प्रस्ताव के तहत महत्वपूर्ण पदों पर रहे वरिष्ठ अधिकारियों को संवेदनशील विषयों पर लिखने से पहले 20 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। पांडुलिपि को प्रकाशन से पहले रक्षा मंत्रालय द्वारा वेटिंग (जांच) प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा। अभी सेवारत कर्मियों के लिए नियम बहुत सख्त हैं, लेकिन सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामले में एक कानूनी ग्रे एरिया (अस्पष्टता) है, जिसे सरकार अब खत्म करना चाहती है।

किताब प्रकरण में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 9 फरवरी को इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि बिना अनिवार्य मंजूरी के किताब का प्री-प्रिंट संस्करण डिजिटल रूप से साझा किया गया है। प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया से भी पूछताछ की गई है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित या वितरित नहीं की गई है। यह केवल दिशानिर्देशों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन का गंभीर मामला है।