दक्षिण सूडान में शांति का नया सवेरा
जुबाः अफ्रीका के सबसे युवा राष्ट्र, दक्षिण सूडान से आ रही खबरें महाद्वीप के लिए आशा की एक नई किरण लेकर आई हैं। पिछले छह घंटों में राजधानी जुबा और अदीस अबाबा से मिली जानकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति साल्वा कीर और उनके प्रतिद्वंद्वी व उपराष्ट्रपति रियाक माचर के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए शांति समझौते को अगले छह महीनों के लिए विस्तारित करने पर सहमति बन गई है।
यह सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि अफ्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र के महीनों के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। इस समझौते के दो मुख्य स्तंभ हैं। देश में पहली बार निष्पक्ष और लोकतांत्रिक चुनाव कराने के लिए एक स्थिर वातावरण तैयार करना। विभिन्न विद्रोही गुटों और हथियारबंद समूहों को एक संप्रभु राष्ट्रीय सेना के तहत एकीकृत करना, ताकि आंतरिक संघर्षों को समाप्त किया जा सके।
दक्षिण सूडान वर्षों से भीषण गृहयुद्ध, अकाल और बड़े पैमाने पर विस्थापन की त्रासदी झेल रहा है। इस समझौते के विस्तार का सबसे मानवीय पहलू यह है कि इससे मानवीय सहायता एजेंसियों को उन दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा, जो संघर्ष के कारण अब तक कटे हुए थे। लाखों शरणार्थियों के लिए यह भोजन, चिकित्सा और पुनर्वास की नई उम्मीद है।
आर्थिक दृष्टिकोण से, दक्षिण सूडान पूरी तरह से तेल उत्पादन पर निर्भर है। संघर्ष के कारण तेल की पाइपलाइनों और रिफाइनरियों को अक्सर नुकसान पहुँचता रहा है। शांति की स्थिति में तेल उत्पादन में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिससे देश की चरमराती अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन मिल सकेगी और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी।
जहाँ एक ओर वाशिंगटन और ब्रसेल्स ने इस कदम का स्वागत किया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सतर्क आशावाद व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजों पर समझौते की अवधि बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; असली चुनौती जमीनी स्तर पर सुधार लागू करने और सत्ता के विकेंद्रीकरण की है। यदि यह शांति बनी रहती है, तो यह न केवल दक्षिण सूडान के लिए बल्कि पूरे पूर्वी अफ्रीका क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।