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अडाणी पोर्ट्स को मिली शीर्ष अदालत ने बड़ी राहत

गुजरात हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

  • चारागाह की जमीन ली गयी है इसमें

  • ग्रामीणों की जनहित याचिका लंबित

  • दूसरे पक्ष को सुना नहीं गया था पहले

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट्स को आवंटित 108 हेक्टेयर चारागाह भूमि को वापस लेने (रिकवरी) का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल चानुरकर की पीठ ने इस मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए यह फैसला सुनाया।

सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा 4 जुलाई 2024 को जमीन वापस लेने का जो आदेश पारित किया गया था, वह प्रभावित पक्ष (अदाणी पोर्ट्स) को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना लिया गया था। न्यायालय के अनुसार, किसी भी आवंटन को रद्द करने से पहले संबंधित पक्ष की सुनवाई अनिवार्य है, जिसके अभाव में यह प्रक्रिया अस्थिरहो जाती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट के निर्देशों को भी खारिज कर दिया गया जो सीधे तौर पर राज्य के इसी आदेश पर आधारित थे।

यह कानूनी विवाद दो दशक पुराना है। 2005 में  नवीनल गांव की लगभग 231 हेक्टेयर चरागाह भूमि मुंद्रा पोर्ट्स को आवंटित की गई थी, जिसे बाद में अदाणी समूह ने अधिग्रहित कर लिया। 2011 में ग्रामीणों ने भूमि पर फेंसिंग शुरू होने के बाद गुजरात हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि चरागाह भूमि कम होने से पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। 2014-2015 में राज्य सरकार ने पहले वैकल्पिक भूमि देने का वादा किया था, लेकिन बाद में जमीन की कमी बताते हुए अपने वादे से पीछे हट गई, जिससे पीआईएल दोबारा बहाल हुई।

2024 में राजस्व अधिकारियों के समाधान खोजने के निर्देश के बाद, राज्य ने अदाणी पोर्ट्स से 108 हेक्टेयर भूमि वापस लेने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य अधिकारियों को इस मामले पर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने अदाणी पोर्ट्स को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति दी है और अनिवार्य किया है कि नया आदेश पारित करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए। तब तक भूमि पर यथास्थिति बनी रहेगी।