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देश भर के छात्रों के साथ प्रधानमंत्री का सीधा संवाद

परीक्षा पे चर्चा 2026 में संतुलन का मंत्र

  • जीवन में हर कुछ का बैलेंस रहे

  • जीवन में कर्म ही सबसे ऊपर है

  • डिजिटल आदतों पर सतर्क भी किया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: बोर्ड परीक्षाओं के आगामी सत्र को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण के माध्यम से देशभर के छात्रों के साथ संवाद किया। इस वार्षिक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने न केवल परीक्षा के तनाव को दूर करने के उपाय बताए, बल्कि व्यक्तिगत विकास, कौशल निर्माण, तकनीक के सही उपयोग और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया।

प्रधानमंत्री ने गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और असम के विभिन्न शहरों सहित दिल्ली स्थित अपने आवास से चुनिंदा एग्जाम वॉरियर्स के साथ बातचीत की। इस दौरान छात्रों ने उनके समक्ष स्वरचित गीत भी प्रस्तुत किए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, इस वर्ष का मुख्य फोकस छात्रों को तनाव मुक्त रखने और सीखने की प्रक्रिया पर जोर देने पर रहा। प्रधानमंत्री ने प्रेरित करते हुए कहा, सपना न देखना एक अपराध है। सपने जरूर देखें, लेकिन केवल उनके बारे में गुनगुनाने से काम नहीं चलता। जीवन में कर्म को सर्वोपरि मानना चाहिए।

पीएम मोदी ने जीवन में संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पढ़ाई, विश्राम, कौशल और शौक को साथ लेकर चलना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जीवन के किसी एक पक्ष की ओर अधिक झुकाव होगा, तो असंतुलन के कारण पतन निश्चित है। उन्होंने कौशल को दो श्रेणियों में विभाजित किया। जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। कौशल की शुरुआत ज्ञान से होती है और इसे निरंतर सीखने और अवलोकन के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

छात्रों को आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा को कभी भी बोझ नहीं समझना चाहिए। अधूरा या आधे मन से किया गया अधिगम सफलता की गारंटी नहीं देता। उन्होंने कहा, जीवन केवल परीक्षाओं के बारे में नहीं है। शिक्षा हमारे विकास का एक माध्यम है। अंकों के बजाय जीवन में सुधार पर ध्यान केंद्रित करें।

उन्होंने शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे केवल परीक्षा के लिए पढ़ाने के बजाय छात्र के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दें। अंत में, प्रधानमंत्री ने इंटरनेट और गेमिंग के प्रति छात्रों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि भारत में इंटरनेट सस्ता होने का मतलब यह नहीं कि समय बर्बाद किया जाए। उन्होंने ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ कड़े रुख की बात की और कहा कि गेमिंग यदि बुद्धिमानी से की जाए तो यह व्यक्तित्व विकास में सहायक हो सकती है, बशर्ते छात्र इसमें गुणवत्ता और विशेषज्ञता खोजें।