केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय चुनाव आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक शुरू की है। असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले अधिकारियों के लिए यह दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया है।
इस ब्रीफिंग सत्र में कुल 1,444 अधिकारियों को बुलाया गया है, जो चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में आयोग की आंख और कान के रूप में कार्य करेंगे। इनका वर्गीकरण इस प्रकार है। सामान्य पर्यवेक्षक 477 अधिकारी, पुलिस पर्यवेक्षक 451 अधिकारी, व्यय पर्यवेक्षक 516 अधिकारी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन पर्यवेक्षकों को चुनाव आयोग का प्रकाश स्तंभ कहा। उन्होंने जोर दिया कि 824 विधानसभा क्षेत्रों में इनकी उपस्थिति से पूरी चुनाव मशीनरी में नई ऊर्जा आएगी और स्वतंत्र व पारदर्शी मतदान सुनिश्चित होगा। चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पर्यवेक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
पर्यवेक्षकों को मतदाताओं और राजनीतिक दलों के लिए आसानी से उपलब्ध रहना चाहिए। उनकी उपस्थिति का व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात का भ्रम न रहे। मतदान के दिन किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए वोटर इंफॉर्मेशन स्लिप का समय पर वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। मतदान केंद्रों पर पीने के पानी, शौचालय, रैंप और बैठने की व्यवस्था जैसी न्यूनतम सुनिश्चित सुविधाओं की निगरानी करना अनिवार्य है।
पर्यवेक्षकों को चुनाव कानूनों, आईटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल टूल्स के उपयोग में पूरी तरह दक्ष होने के लिए कहा गया है। उन्हें जमीनी स्तर से सीधे आयोग को फीडबैक देने और शिकायतों का त्वरित समाधान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह मिशन भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और आगामी महीनों में होने वाले इन हाई-स्टेक चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।