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भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर जानकारी पर बवाल

नाराज विपक्ष ने राज्यसभा का वहिष्कार कर दिया

  • ट्रंप के दावों में कितनी सच्चाई है

  • भारत ने बदले में क्या दिया, यह बतायें

  • जेपी नड्डा ने कहा विपक्ष के पास मुद्दा नहीं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। बुधवार, 4 फरवरी 2026 को राज्यसभा में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ, जिसके बाद समूचे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात पर है कि इतने महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा भारत सरकार के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एकतरफा तरीके से की गई। विपक्षी दलों ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी और राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि भारतीयों को इस सौदे के बारे में सबसे पहले वाशिंगटन से पता चला, न कि भारतीय संसद से। राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि भारत पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत (जो कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक पहुँच गया था) से घटाकर 18 फीसद कर दिया गया है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि इसके बदले भारत ने क्या रियायतें दी हैं।

ट्रंप के दावों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है। विपक्ष इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और दीर्घकालिक मित्र (रूस) के साथ विश्वासघात मान रहा है।

शिवसेना सांसद संजय राउत और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारत ने अपने कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलने की सहमति दी है, जिससे भारतीय किसानों के हितों को नुकसान होगा। संजय राउत ने यह भी दावा किया कि यह सौदा गौतम अडानी को बचाने के लिए किया गया है।

सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने विपक्ष के आचरण की कड़ी आलोचना की। नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष अच्छे काम में भी बुराई देखने की प्रवृत्ति रखता है और केवल राजनीतिक हताशा के कारण व्यवधान पैदा कर रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस समझौते पर विस्तृत विवरण के साथ एक स्वतः संज्ञान बयान देने के लिए तैयार है।

नड्डा ने विपक्ष को मुद्दाविहीन बताते हुए कहा कि वे जनता को गुमराह करने और डराने का प्रयास कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी सदस्यों को शांत करने का प्रयास किया और चेतावनी दी कि जब सरकार जवाब दे रही हो, तब नारेबाजी करना लोकतंत्र के लिए घातक है।