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चुनावी शंख फूंकने के लिए भाजपा के  चाणक्य अमित शाह पहुंचे असम

मिया मुस्लिम मुद्दे पर हिमंता का बयान, लाखों आपत्तियां

  • गौरव गोगोई एक पाकिस्तानी एजेंट

  • चुनाव के मौके पर सीएम का हमला

  • प्रवीण तोगड़िया भी असम में सक्रिय

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम में मार्च-अप्रैल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य का राजनीतिक पारा चरम पर है। 29 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर असम पहुंचे। उनका यह दौरा न केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की घोषणाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऊपरी असम में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे मतदाता सूची के विशेष संशोधन को विदेशी पहचान की राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने इस प्रक्रिया के दौरान लगभग पाँच लाख शिकायतें दर्ज की हैं। सरमा ने मिया (बंगाली मूल के मुस्लिम) समुदाय की बढ़ती आबादी और ऊपरी असम में अज्ञात लोगों की मौजूदगी पर चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया संदिग्ध नागरिकों की स्थिति स्पष्ट कर देगी।

इसी क्रम में, अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के नेता डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री से मांग की कि राज्य में रह रहे कथित 50 लाख अवैध बांग्लादेशियों का डीएनए परीक्षण कराया जाए और उन्हें ढाका निर्वासित किया जाए। उनका तर्क है कि यदि इन लोगों को बाहर निकाल दिया जाए, तो मतदाता सूची के संशोधन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

चुनावी माहौल उस समय और अधिक गरमा गया जब मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने गोगोई को पाकिस्तानी एजेंट करार दिया और उनके पारिवारिक संबंधों पर विवादित टिप्पणी की। सरमा ने चुनौती देते हुए कहा कि वह फरवरी में इससे जुड़े तथ्य सार्वजनिक करेंगे।

दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने बराक घाटी में हुंकार भरते हुए दावा किया कि इस बार राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत तरुण गोगोई की विरासत को याद करते हुए कहा कि कांग्रेस ही क्षेत्र की राजनीतिक सुरक्षा और विकास सुनिश्चित कर सकती है। वर्तमान में असम की राजनीति आप्रवासन, नागरिकता पहचान और व्यक्तिगत आरोपों के इर्द-गिर्द सिमट गई है, जो आगामी चुनावों के बेहद संघर्षपूर्ण होने का संकेत दे रही है।