Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
क्या भारत में नागरिकों को हासिल है पूरी आजादी? जानिए संविधान प्रदत्त 11 अधिकारों के साथ जुड़ी अहम का... क्या NDA में होगा बड़ा विस्तार? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बीच DMK, NCP और अकाली दल के साथ आने क... महाराष्ट्र के सांगली में बड़ा हादसा: रेणावी घाट में दो ST बसों की आमने-सामने भीषण टक्कर स्वतंत्रता दिवस 2026: दिल्ली मेट्रो की विशेष व्यवस्था, लाल किला और जामा मस्जिद के लिए सुबह 4 बजे से ... अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत परमहंस रामचंद्र दास के स्मृति समारोह में हुए शामिल 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, देशवासि... PM मोदी और विदेश नीति पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी को घेरा,... CJI सूर्य कांत विवाद के बाद सुर्खियों में NALSAR यूनिवर्सिटी, BCI ने वापस लिया निलंबन फैसला 4,200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब 15 अगस्त को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस, लाल किले पर समारोह के दौरान मौसम पर टिकीं निगाहें

चीन में सैन्य तख्तापलट की आहट?

चीन के सबसे वरिष्ठ जनरल के खिलाफ जांच की प्रक्रिया

  • सैन्य नेतृत्व में बढ़ती अस्थिरता

  • पहले भी कई अफसरों पर कार्रवाई

  • शायद जिनपिंग को खतरा डरा रहा है

बीजिंगः चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने सबसे वरिष्ठ जनरल को जांच के दायरे में लेकर दुनिया भर के सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है। यह कदम चीनी सेना के भीतर चल रहे उस निर्मम शुद्धिकरण अभियान का हिस्सा है, जो भ्रष्टाचार और अविश्वसनीयता को खत्म करने के नाम पर चलाया जा रहा है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब चीन अपनी सैन्य शक्ति के विस्तार पर आक्रामक रूप से काम कर रहा है। हालांकि, शीर्ष रैंक के जनरलों को लगातार हटाए जाने से दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का नेतृत्व खोखला होता दिख रहा है।

जिस जनरल को जांच के दायरे में लिया गया है, वह शी जिनपिंग के करीबी माने जाते थे। उनके खिलाफ कार्रवाई यह संकेत देती है कि शी अब अपनी वफादारी के दायरे में भी किसी पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इसे भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेना पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित विद्रोह को कुचलने की रणनीति है। इससे पहले चीन ने अपनी रणनीतिक रॉकेट फोर्स के शीर्ष अधिकारियों को भी इसी तरह हटाया था, जिससे चीन की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं के प्रबंधन पर सवाल उठे थे।

चीनी सेना के भीतर यह उथल-पुथल न केवल चीन की आंतरिक स्थिति को दर्शाती है, बल्कि इसके वैश्विक प्रभाव भी हैं। क्या सैन्य नेतृत्व में इस तरह की अस्थिरता के बीच चीन ताइवान या दक्षिण चीन सागर जैसे मोर्चों पर कोई बड़ा कदम उठाने का जोखिम उठा पाएगा? वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच चीनी सैन्य नेतृत्व में बदलाव भारत के लिए सतर्क रहने का संकेत है।

नेतृत्व की अनिश्चितता कभी-कभी ध्यान भटकाने के लिए बाहरी आक्रामकता को जन्म दे सकती है। शी जिनपिंग का यह कदम साफ करता है कि वे सेना के भीतर किसी भी स्वतंत्र शक्ति केंद्र को पनपने नहीं देना चाहते, चाहे इसके लिए उन्हें अपने सबसे भरोसेमंद जनरलों की ही बलि क्यों न देनी पड़े।