तीन राज्यों के बारे में चुनाव आयोग का नया फैसला
राष्ट्रीय खबर
तिरुअनंतपुरमः भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केरल, गुजरात और तमिलनाडु राज्यों में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 जनवरी कर दिया है। यह कदम उन नागरिकों के लिए एक बड़ा अवसर है जो अभी तक अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं करा पाए हैं या जिनमें सुधार की आवश्यकता है।
निर्वाचन आयोग का यह फैसला माननीय उच्चतम न्यायालय के एक हालिया आदेश के बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया था कि वह दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने पर गंभीरता से विचार करे ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रह जाए।
अदालत के सुझाव के साथ-साथ केरल, गुजरात और तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने भी आयोग से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इन राज्यों की विशिष्ट परिस्थितियों और प्रशासनिक कारकों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने इस विस्तार को मंजूरी दी है।
विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के मसौदे (Draft Rolls) अलग-अलग तिथियों पर प्रकाशित किए गए थे। केरल में मसौदा मतदाता सूची 23 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित की गई थी। मूल योजना के अनुसार, दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 23 दिसंबर से 22 जनवरी तक निर्धारित थी। गुजरात और तमिलनाडु में मसौदा सूची 19 दिसंबर को प्रकाशित हुई थी। यहाँ आवेदन जमा करने की प्रारंभिक खिड़की 19 दिसंबर से 18 जनवरी तक तय की गई थी।
समय सीमा में इस विस्तार का मतलब है कि अब इन तीनों राज्यों के नागरिक 30 जनवरी तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटवाने या किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिहीन और समावेशी हो। यह उन युवाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो हाल ही में मतदान की पात्रता आयु पूरी कर चुके हैं। प्रशासनिक स्तर पर, अतिरिक्त समय मिलने से चुनाव अधिकारियों को भी डेटा के सत्यापन और प्रसंस्करण में अधिक सटीकता बरतने का मौका मिलेगा।