रक्षा खरीद बोर्ड ने विचार के बाद प्रस्ताव को मंजूरी दी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर ले जाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाले रक्षा खरीद बोर्ड ने फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये (36 अरब डॉलर) की लागत वाला यह सौदा भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा अधिग्रहण माना जा रहा है। भारतीय वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रही है। वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में केवल 29-30 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं।
मिग-21 जैसे पुराने विमानों के रिटायर होने और स्वदेशी तेजस प्रोजेक्ट में हो रही देरी के कारण पैदा हुए इस कैपेबिलिटी गैप को भरने के लिए राफेल को सबसे सटीक विकल्प माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ युद्ध की स्थिति में राफेल ही वायुसेना की रीढ़ साबित होगा।
इस मेगा डील की सबसे बड़ी विशेषता इसका मेक इन इंडिया स्वरूप है। प्रस्तावित योजना के अनुसार 12 से 18 विमान फ्रांस से सीधे तैयार स्थिति में भारत आएंगे। शेष 96-102 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ मिलकर नागपुर या हैदराबाद में अपनी फाइनल असेंबली लाइन स्थापित कर सकती है। इन विमानों में 30 से 60 प्रतिशत तक भारतीय उपकरण और हथियार प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा।
डीपीबी की मंजूरी इस जटिल प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण है। अब यह प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के पास जाएगा, जहाँ से आवश्यकता की स्वीकृति मिलने के बाद इसे अंतिम मुहर के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी को भेजा जाएगा।
यह घटनाक्रम अगले महीने (फरवरी 2026) फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच इस समझौते पर उसी दौरान हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो भारत के पास कुल 176 राफेल विमान (36 वायुसेना के पास पहले से मौजूद और 26 नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए विमानों सहित) हो जाएंगे, जिससे भारत दुनिया में राफेल के सबसे बड़े ऑपरेटरों में से एक बन जाएगा। वैसे माना जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक राफेल विमान क्षतिग्रस्त हुआ है।