वेनेजुएला के अमेरिकी हमले में मारे गये थे 32 सैनिक
हवाना: क्यूबा सरकार ने वेनेजुएला में हाल ही में हुए एक अमेरिकी सैन्य हमले में मारे गए अपने 32 सैनिकों को आधिकारिक तौर पर श्रद्धांजलि दी है। हवाना के ‘रिवोल्यूशन स्क्वायर’ पर आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में क्यूबा के राष्ट्रपति और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने इन सैनिकों को ‘क्रांति के शहीद’ बताते हुए उनके बलिदान को याद किया।
यह घटना उस समय हुई जब वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की कोशिशों के बीच अमेरिकी वायुसेना ने कथित तौर पर एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था। अमेरिका का दावा था कि वह वेनेजुएला की संप्रभुता की रक्षा और विदेशी हस्तक्षेप को रोकने के लिए सटीक हमले कर रहा है। हालांकि, क्यूबा का कहना है कि उसके सैनिक वहां केवल तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण मिशन पर थे, न कि किसी सक्रिय युद्ध में।
क्यूबा के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन करार दिया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की यह आक्रामक नीति लैटिन अमेरिका में शांति को अस्थिर करने का प्रयास है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्यूबा और वेनेजुएला के बीच का रणनीतिक गठबंधन इस तरह के हमलों से कमजोर नहीं होगा।
इस हमले के बाद लैटिन अमेरिका के कई देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। रूस और चीन ने भी क्यूबा के सैनिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त करते हुए अमेरिका के एकतरफा सैन्य बल प्रयोग की आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से वाशिंगटन और हवाना के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और अधिक बिगड़ सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में शीत युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा है।
32 सैनिकों की मौत ने क्यूबा के भीतर देशभक्ति की एक नई लहर पैदा कर दी है। जहाँ अमेरिका इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बता रहा है, वहीं क्यूबा इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। यह घटना दर्शाती है कि लैटिन अमेरिका एक बार फिर वैश्विक शक्तियों के बीच शक्ति संघर्ष का केंद्र बन गया है।