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अदालत में ईडी के बयान से नये समीकरण बने

ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक जीत में बदला

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भारतीय राजनीति में स्ट्रीट फाइटर के रूप में जाना जाता है, और हाल ही में आई-पैक के कार्यालयों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी ने इस छवि को और पुख्ता कर दिया है। 8 जनवरी 2026 को हुई इस नाटकीय घटना को ममता बनर्जी ने न केवल एक कानूनी चुनौती के रूप में लिया, बल्कि इसे जनता के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक जीत के रूप में पेश करने में सफलता हासिल की।

जब ईडी ने कोयला घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित आई-पैक कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर सुबह 6 बजे छापेमारी शुरू की, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया। वह खुद मौके पर पहुँच गईं।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी जांच के नाम पर उनकी पार्टी की आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियाँ, उम्मीदवारों की सूची और गोपनीय डेटा चोरी करने की कोशिश कर रही है। छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी का एक हरे फोल्डर और लैपटॉप के साथ बाहर आना एक शक्तिशाली विजुअल नैरेटिव बन गया। उन्होंने खुलेआम चुनौती दी कि मैंने अपनी पार्टी के दस्तावेज बचा लिए हैं।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 14 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान ईडी ने आधिकारिक तौर पर बयान दिया कि उन्होंने आई-पैक परिसर से कुछ भी जब्त नहीं किया है। ममता बनर्जी और टीएमसी ने इस तकनीकी बयान को तुरंत एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। टीएमसी ने इसे इस तरह प्रचारित किया कि मुख्यमंत्री के साहसी हस्तक्षेप के कारण ही ईडी कुछ भी लूट नहीं पाई। कुछ भी जब्त नहीं हुआ का अर्थ जनता के बीच यह संदेश गया कि कुछ भी अवैध नहीं था या दीदी ने उन्हें रोक दिया।

ममता बनर्जी ने इसे पश्चिमी बंगाल की अस्मिता और लोकतंत्र की हत्या से जोड़ दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जब भाजपा राजनीतिक रूप से नहीं लड़ सकती, तो वह उनके वॉर रूम पर छापा मारती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने ममता बनर्जी के शासक बनाम रक्षक वाली छवि को मजबूत किया है। जहाँ भाजपा ने इसे जांच में बाधा और सबूतों की चोरी करार दिया, वहीं बंगाल के आम मतदाता के बीच ममता बनर्जी एक ऐसी नेता के रूप में उभरीं जो दिल्ली की सत्ता से सीधे टकराने का दम रखती हैं। कानूनी तौर पर भले ही यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन राजनीतिक रूप से ममता बनर्जी ने इस रेड को भाजपा के खिलाफ एक बड़े प्रचार अभियान में बदल दिया है।