Breaking News in Hindi

ममता बनर्जी शेरनी है, हार नहीं मानेंगीः महबूबा मुफ्ती

ईडी से सीधे टकराव के बाद पीडीपी प्रमुख का बयान आया

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जमकर सराहना की और उन्हें शेरनी करार दिया। कोलकाता में आई-पैक के कार्यालयों पर प्रवर्तन निदेशालय की हालिया छापेमारी के बाद पैदा हुए राजनीतिक तनाव के बीच महबूबा का यह बयान सामने आया है। श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक बेहद साहसी महिला हैं और वे केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के आगे कभी आत्मसमर्पण नहीं करेंगी।

महबूबा मुफ्ती ने इस छापेमारी की तुलना जम्मू-कश्मीर के हालातों से करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, जो प्रयोग जम्मू-कश्मीर में प्रयोगशाला के तौर पर शुरू किए गए थे, अब उन्हें पूरे देश में दोहराया जा रहा है। जांच एजेंसियों के माध्यम से विपक्षी नेताओं को डराना अब एक राष्ट्रीय पैटर्न बन गया है।

उन्होंने याद दिलाया कि जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया था और जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में लिया गया था, तब देश के अधिकांश राजनीतिक दल चुप रहे थे। मुफ्ती ने तंज कसते हुए कहा, जिस कड़वे घूँट को हमने सालों पहले पिया था, अब पूरा देश उसका स्वाद चख रहा है।

मुफ्ती ने ममता बनर्जी द्वारा छापेमारी स्थल पर खुद पहुँचने और ईडी की कार्रवाई का विरोध करने के साहस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी न केवल एक बहादुर नेता हैं, बल्कि वे भाजपा की दबाव की राजनीति का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना जानती हैं। महबूबा के अनुसार, जिस तरह से बंगाल में चुनाव से पहले रणनीतिकारों और सलाहकारों को निशाना बनाया जा रहा है, वह भाजपा की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बंगाल की जनता लोकतंत्र पर हो रहे इस ‘बुलडोजर प्रहार’ का करारा जवाब देगी।

इसके अतिरिक्त, महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के स्थानीय मुद्दों पर भी बात की और एक मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के फैसले को मुस्लिम विरोधी मानसिकता का हिस्सा बताया। उन्होंने चेताया कि यदि विपक्षी नेता अब भी एकजुट होकर इन नीतियों का विरोध नहीं करते हैं, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाना नामुमकिन हो जाएगा। ममता बनर्जी को दिए गए उनके इस समर्थन को राजनीतिक हलकों में इंडिया गठबंधन के भीतर बढ़ती एकजुटता के रूप में भी देखा जा रहा है।