रूस के सुदूर उत्तर के निवासियों के सामने नई परेशानी
मॉस्कोः रूस के सुदूर उत्तर में स्थित साइबेरियाई क्षेत्र से एक अत्यंत दुर्लभ और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक विशालकाय ध्रुवीय भालू ने मछली पकड़ रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों पर अचानक हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। क्षेत्रीय आंतरिक मंत्रालय ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हमला ननसेट स्वायत्त क्षेत्र के नोसोक गांव से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक दुर्गम स्थान पर हुआ।
अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, घायलों में एक मासूम बच्चा भी शामिल है। पुलिस रिपोर्ट में पीड़ितों की पहचान उनके जन्म वर्ष के आधार पर की गई है, जिनमें से एक का जन्म 1983, दूसरे का 2006 और सबसे छोटे सदस्य का जन्म 2015 में हुआ था। हमले की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल सक्रिय हो गए।
परिवार को तुरंत उस सुदूर इलाके से सुरक्षित स्थान पर एयरलिफ्ट किया गया और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की गई। चिकित्सा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि घायलों में से एक की स्थिति काफी चिंताजनक है, जिसे विशेष उपचार के लिए बड़े अस्पताल में भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जीव विज्ञानी और वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि ध्रुवीय भालू स्वभाव से इंसानों से दूरी बनाकर रखते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनके व्यवहार में आया यह हिंसक बदलाव बेहद चिंताजनक है। इसका मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग को माना जा रहा है। आर्कटिक क्षेत्र में तापमान वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी से भी अधिक तेजी से बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप समुद्री बर्फ, जो इन भालुओं के शिकार का मुख्य आधार है, तेजी से पिघल रही है। अपना प्राकृतिक आवास और भोजन के स्रोत (जैसे सील मछली) खोने के बाद, ये शक्तिशाली शिकारी अब भूख मिटाने के लिए इंसानी बस्तियों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।
यह घटना कोई अकेली मिसाल नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा और अमेरिका के अलास्का जैसे क्षेत्रों में भी ऐसे जानलेवा हमलों में बढ़ोत्तरी देखी गई है। अगस्त 2024 में कनाडा के एक सुदूर रडार स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी को भालू ने मार डाला था, जबकि 2023 में अलास्का के वेल्स शहर में एक महिला और उसका छोटा बेटा इसी तरह के हमले का शिकार बने थे। साइबेरिया की यह ताजा घटना न केवल वन्यजीवों के संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के कारण चरमराते पारिस्थितिक तंत्र की एक गंभीर चेतावनी भी है।