काठमांडु में जारी ईलाज से स्थिति में सुधार नहीं
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में प्रमुख स्थान रखने वाली अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के पति और वरिष्ठ नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। 74 वर्षीय सुबेदी को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य लाभ न मिलने के बाद अब उन्नत चिकित्सा उपचार के लिए भारत की राजधानी नई दिल्ली ले जाया जा रहा है।
दुर्गा प्रसाद सुबेदी को पिछले गुरुवार को काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के सूत्रों और वहां कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सकों ने पुष्टि की कि भर्ती होने के बाद से उनके स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं देखा गया।
एक डॉक्टर ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, उन्हें शुरुआत में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, शरीर में सोडियम के स्तर में भारी गिरावट और पेट से संबंधित जटिलताओं की शिकायत के बाद भर्ती किया गया था। विशेषज्ञों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही थी।
उनकी बीमारी के मूल कारण का पता लगाने के लिए अस्पताल में व्यापक परीक्षण किए गए। डॉक्टरों ने बताया कि उनके कई सीटी स्कैन और एमआरआई परीक्षण किए गए ताकि किसी आंतरिक गंभीर समस्या का पता लगाया जा सके। हालांकि, इन सभी अत्याधुनिक परीक्षणों के बावजूद डॉक्टर किसी एक विशिष्ट बीमारी या स्थिति की पुष्टि नहीं कर सके।
प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के निजी चिकित्सक, डॉ. मान बहादुर केसी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि काठमांडू में उनका प्राथमिक उपचार किया गया, लेकिन परिवार ने बेहतर संतुष्टि और सेकंड ओपिनियन के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला किया है। उन्हें आज शाम अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
दुर्गा प्रसाद सुबेदी केवल प्रधानमंत्री के पति ही नहीं, बल्कि नेपाली कांग्रेस के एक ऐतिहासिक और प्रभावशाली नेता रहे हैं। उनका और प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का परिचय उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हुआ था। सुबेदी का नाम नेपाल के राजनीतिक इतिहास में 1973 के पहले विमान अपहरण कांड के मुख्य किरदारों में शुमार है।
10 जून 1973 को, सुबेदी और नेपाली कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं ने रॉयल नेपाल एयरलाइंस के एक विमान (ट्विन ओटर) का अपहरण किया था, जो बिराटनगर से काठमांडू जा रहा था। इस दुस्साहसिक अभियान की योजना पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तत्कालीन राजा महेंद्र की राजशाही के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए धन जुटाना था।
अपहरणकर्ताओं ने विमान में रखे सरकारी खजाने के करीब 30 लाख नेपाली रुपये हासिल किए थे और विमान को बिहार के फारबिसगंज में एक घास के मैदान पर उतरवाया था। सुबेदी ने इस पूरे घटनाक्रम का विवरण अपनी चर्चित पुस्तक बिमान बिद्रोह में भी दिया है।