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कोयलांचल का नायाब हीरा: साकेत कुमार ने IES 2025 में रचा इतिहास

धनबादः कोयलांचल काले हीरे के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां धरती के ऊपर भी कई नायाब हीरे हैं. साकेत कुमार सिन्हा भी उन्हीं में से एक हैं, जिन्होंने 15 घंटे की नौकरी के बाद भी कड़ी मेहनत करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने IES 2025 में ऑल इंडिया में 31वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया.

पाथरडीह में मोहन बाजार के रहने वाले शिक्षक और एलआईसी एजेंट आर.के. सिन्हा के बेटे साकेत कुमार सिन्हा ने इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES) 2025 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 31 हासिल की है. यूपीएससी द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित परीक्षा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विषय से यह उपलब्धि पाकर साकेत ने राष्ट्रीय फलक पर जिले की पहचान बनाई. 17 दिसंबर 2025 को घोषित हुए अंतिम परिणाम ने उनके इस शानदार सफर पर मुहर लगा दी.

शैक्षणिक और करियर की गौरवशाली यात्रा

साकेत की शिक्षा और मेहनत की मिसाल उनकी सफलता के हर चरण में दिखाई देती है. चासनाला एकेडमी स्कूल से दसवीं और बारहवीं परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री के लिए बीआईटी सिंदरी में दाखिला लिया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक पूरा किया. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए. वर्ष 2018 में गेट परीक्षा में ऑल इंडिया में 71वां रैंक लाकर उन्होंने पहली बड़ी सफलता हासिल की.

2018 में ही साकेत का चयन ओएनजीसी, राजमुंदरी (आंध्र प्रदेश) में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में हुआ. व्यस्त कामकाज के बावजूद उन्होंने अपनी उच्च आकांक्षाओं को बनाए रखा और कठिन परिश्रम और अनुशासन का परिचय देते हुए IES जैसी मुश्किल परीक्षा में भी सफलता पाई. साकेत रोजाना 15 घंटे ऑफिस की जिम्मेदारी पूरी करने के बाद बाकी समय का उपयोग अपनी पढ़ाई के लिए करते थे.

परिवार का सहयोग और प्रेरणा

साकेत की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान है. उनके पिता जो पहले एक शिक्षक और स्कूल संचालक रह चुके हैं उन्होंने बेटे की इस उपलब्धि पर कहा, ‘इतने लंबे समय तक नौकरी के बाद भी लगन और ईमानदारी से तैयारी करने वाली मानसिकता बहुत बड़ी बात है.’

उनकी माता मुनि प्रतिमा एक गृहिणी हैं और हमेशा परिवार को सकारात्मक माहौल और प्रेरणा देती रही हैं. साकेत के बड़े भाई, पीयूष कुमार सिन्हा, केनरा बैंक, गुरुग्राम में वरिष्ठ प्रबंधक हैं. उनकी बड़ी बहन, अपराजिता कुमारी, बैंक ऑफ इंडिया, बोकारो में प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं. उनकी भाभी, सोनाली वर्मा भी एलआईसी ऑफ इंडिया, गुरुग्राम में पदस्थ हैं. एक शिक्षित और सेवा-भावी परिवार ने साकेत को हमेशा प्रेरित किया.

सफलता का मंत्र और युवाओं के लिए संदेश

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए साकेत ने कहा: ‘मेरी सफलता की कुंजी निरंतर अभ्यास, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति सच्ची निष्ठा है.’ साकेत ने युवाओं को संदेश दिया कि ‘नौकरी के साथ- साथ तैयारी कठिन जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं. सही रणनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति किसी भी ऊंचाई को छू सकती है.’

साकेत की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिश्रम और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उनकी सफलता ने यह संदेश दिया कि साधारण नौकरी से भी असाधारण मंजिलें पाई जा सकती है.