शरणार्थियों और बच्चों के अकाल का डर और सर्दियाँ
गाजाः दिसंबर 2025 में गाजा पट्टी से आ रही खबरें राहत और चिंता का मिला-जुला संदेश दे रही हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय खाद्य सहायता संगठनों की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में बड़े पैमाने पर रसद और खाद्य सामग्री पहुँचाने के बाद तत्काल अकाल के मंडराते खतरे को फिलहाल टाल दिया गया है।
हालांकि, सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यह सुधार बहुत नाजुक है और स्थिति अभी भी किसी भी समय नियंत्रण से बाहर हो सकती है। जैसे-जैसे सर्दियों का मौसम अपनी चरम सीमा पर पहुँच रहा है, गाजा के नागरिकों के लिए मुसीबतें दोगुनी हो गई हैं। वर्तमान में हज़ारों परिवार फटे-पुराने टेंटों में रहने को मजबूर हैं, जो कड़कड़ाती ठंड और बारिश को रोकने में सक्षम नहीं हैं।
गर्म कपड़ों, कंबलों और हीटिंग की भारी कमी ने बच्चों और बुजुर्गों को हाइपोथर्मिया और श्वसन संबंधी रोगों के प्रति बेहद संवेदनशील बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, बुनियादी ढांचे के विनाश के कारण शरणार्थी शिविरों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं है, जिससे बारिश का पानी टेंटों के भीतर जमा हो रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक गंभीर डेटा साझा करते हुए बताया है कि केवल भोजन पहुँचाना ही पर्याप्त नहीं है। गाजा में स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता की भीषण कमी है। जब लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर होते हैं, तो वे डायरिया और अन्य बीमारियों का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनके शरीर को भोजन से मिलने वाला पोषण नहीं मिल पाता। यही कारण है कि सहायता पहुँचने के बावजूद बच्चों में कुपोषण की दर अभी भी खतरनाक स्तर पर बनी हुई है।
गाजा का उत्तरी हिस्सा अब भी मानवीय सहायता के लिए सबसे कठिन क्षेत्र बना हुआ है। सैन्य चौकियों और निरंतर जारी संघर्ष के कारण यहाँ रसद पहुँचाना एक बड़ी चुनौती है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सर्दियों के आने वाले तीन महीने गाजा के निवासियों के लिए सबसे कठिन परीक्षा साबित होंगे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक सुर में तत्काल युद्धविराम की मांग कर रहा है ताकि एक स्थायी मानवीय गलियारा बनाया जा सके। यदि रसद की आपूर्ति में थोड़ी भी बाधा आती है, तो अकाल की स्थिति फिर से पैदा हो सकती है, जो इस बार और भी अधिक घातक होगी।