Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
भविष्य की वायरलेस तकनीक में अधिक रफ्तार होगी मलेशिया से आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर बयान वक्फ संशोधन विधेयक भी गरमी बढ़ेगी अपने अंतरिक्ष अभियान को धीमा करने को तैयार नहीं इसरो असम ने गौरव गोगोई के खिलाफ भेजी रिपोर्ट Telangana: ज्योतिबा फुले की प्रतिमा में तोड़फोड़ पर बवाल, महाराष्ट्र के मंत्री ने अमित शाह को लिखा प... Delhi Politics: AAP का बीजेपी पर बड़ा हमला, दिल्ली में भाजपा के 1 साल के कार्यकाल को बताया 'फ्रॉड डे... दिल्ली की सड़कों पर संग्राम! सौरभ भारद्वाज और AAP कार्यकर्ताओं की पुलिस से भिड़ंत, हिरासत में लिए गए... हिंदुओं की दरअसल चार श्रेणियां हैः भागवत रेखा गुप्ता का 'मिशन दिल्ली'! 1 साल में खर्च किए 250 करोड़, रिपोर्ट कार्ड पेश करते समय क्यों हुईं भा...

410 अरब की ब्रह्मोस मिसाइल के क्रेता लाइन में

रक्षा निर्यात में भारतीय मिसाइल की निरंतर बढ़ रही मांग

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बाजार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रही है, और कई देशों द्वारा इसे खरीदने की तीव्र इच्छा व्यक्त की गई है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत जल्द ही इस मिसाइल के निर्यात के लिए 41 अरब रुपये (लगभग 4.10 बिलियन रुपये) का एक बड़ा सौदा करने वाला है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए इच्छुक देशों की सूची इस सौदे से कहीं अधिक लंबी है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित, ब्रह्मोस मिसाइल ने अपने सफल परीक्षणों से वैश्विक ध्यान खींचा है। हालांकि, इसकी वास्तविक ताकत तब उजागर हुई जब इसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस ऑपरेशन के पहले चरण में, ब्रह्मोस ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया। इसके बाद, दूसरे चरण में इसने पाकिस्तानी वायुसेना के अड्डों को निष्क्रिय करके उनकी क्षमता को पंगु बना दिया। इस प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद, दुनिया भर के देशों में इसे खरीदने की होड़ मच गई।

हाल ही में दुबई में आयोजित एयर शो में भी ब्रह्मोस को प्रदर्शित किया गया, जहाँ कई देशों ने इसमें गहरी रुचि दिखाई। रक्षा सूत्रों ने खुलासा किया है कि मित्र देशों के अलावा भी, दुनिया के कई अन्य राष्ट्रों ने इस मिसाइल प्रणाली को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण दिलचस्पी दिखाई है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

हथियारों के सबसे बड़े आयातक की अपनी पुरानी पहचान को छोड़कर, भारत अब एक स्थापित रक्षा निर्यातक के रूप में अपनी धाक जमा रहा है। देश का रक्षा निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जो रक्षा निर्यात कुछ वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाता था, वह अब 25,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने 2029 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये से अधिक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भारत वर्तमान में 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण और हथियार आपूर्ति कर रहा है, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, इटली और रूस जैसे विकसित देश भी शामिल हैं।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विदेशी खरीदारों की सूची में सबसे ऊपर बनी हुई है। इसकी पहली बड़ी बिक्री 2022 में फिलीपींस को की गई थी, और अब इस कतार में कम से कम 16 देश शामिल हैं। संभावित खरीदारों में सबसे आगे वियतनाम है। इसके अतिरिक्त, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्राजील, ब्रुनेई, चिली, अर्जेंटीना, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और मिस्र जैसे देश भी इस मिसाइल प्रणाली को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की सफलता के बाद, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना, वायु सेना और थल सेना के लिए भी इसकी बड़ी खरीद को मंजूरी दी थी, जिससे इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता और मजबूत हुई है।