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चंबल के 24 एलिगेटरों का नया ठिकाना बना सीधी का सोन घड़ियाल अभयारण्य, फिर बढ़ेगी रौनक

सीधी: सोन घड़ियाल अभयारण्य में नर घड़ियालों की मौत के बाद यहां इनकी संख्या शून्य हो गई थी और ऐसी स्थिति में यहां प्रजनन पूरी तरह से ठप हो गया था. ऐसी स्थिति में शुक्रवार को वन विभाग की टीम सक्रिय दिखी. यहां चंबल से 24 नर घड़ियालों को लाकर अभयारण्य के कई क्षेत्रों में छोड़ा गया. इसके अलावा 25 कछुओं को भी जोगदहा अभयारण्य में छोड़ा गया.

सोन घड़ियाल अभयारण्य में छोड़े गए 24 नर घड़ियाल

सोन घड़ियाल अभयारण्य में नर घड़ियालों की रहस्यमयी मौत के बाद चंबल से 24 नर घड़ियाल और एक मादा घड़ियाल को यहां लाया गया. सोन नदी स्थित जोगदहा अभयारण्य में 13 नर घड़ियाल और भवरसेन क्षेत्र में 12 नर घड़ियालों के छोटे बच्चों को छोड़ा गया है. इस अभयारण्य में मादा घड़ियाल तो मौजूद हैं लेकिन नर घड़ियाल एक भी नहीं बचे थे. इस कारण सोन अभयारण्य में घड़ियालों का प्रजनन ठप हो गया था.

25 कछुओं को भी सोन अभयारण्य में छोड़ा

सोन घड़ियाल अभयारण्य में विभिन्न प्रजातियों के 25 कछुए भी लाए गए. इन कछुओं को भिंड से यहां लाया गया है. इन सभी कछुओं को अभयारण्य में सुरक्षित रूप से छोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई.

‘अभयारण्य में नहीं बचे थे नर घड़ियाल’

डीएफओ राजेश कन्ना टी ने बताया कि “अभयारण्य में मादा घड़ियाल तो मौजूद थीं लेकिन नर घड़ियालों की संख्या शून्य हो गई थी. ऐसी स्थिति में प्रजनन पूरी तरह ठप हो गया था, जिसके कारण विभाग लंबे समय से नर घड़ियालों की डिमांड कर रहा था. आज चंबल से आई खेप ने इस चिंता को काफी हद तक दूर कर दिया है. यहां चंबल से लाए गए 24 नर घड़ियालों को छोड़ा गया है.”

1981 में की गई थी सोन अभयारण्य की स्थापना

इस अभयारण्य की स्थापना साल 1981 में की गई थी. ये अभयारण्य सोन नदी, बनास नदी और गोपद नदी पर 210 किलोमीटर के रेंज में फैला हुआ है. जहां शुरू में मगर और घड़ियाल लाकर बसाए गए थे. शुरुआत में तो घड़ियाल और मगरमच्छों की संख्या में उम्मीद के मुताबिक अच्छी वृद्धि हुई लेकिन फिर अचानक घड़ियालों की संख्या में गिरावट शुरू हो गई. जिसे नियंत्रित करना अभयारण्य के अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी. 2021 में सोन अभ्यारण्य में घड़ियालों को लाकर छोड़ा गया था और उनकी संख्या फिर से बढ़ी थी. लेकिन बीते कुछ साल में यह नर घड़ियाल फिर शून्य हो गए और ऐसी स्थिति में अब फिर से यहां 24 नर घड़ियालों को छोड़ा गया है.