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लोकपाल में बीएमडब्ल्यू खरीद का मामला गरमाया

कांग्रेस सांसदों ने फैसले की की आलोचना की

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और राज्यसभा सांसदों पी. चिदंबरम और अभिषेक मनु सिंघवी ने भ्रष्टाचार-रोधी प्रहरी लोकपाल द्वारा अपने सदस्यों के लिए सात बीएमडब्ल्यू लग्जरी कारें खरीदने के कदम की कड़ी निंदा की है। इनमें से प्रत्येक कार की ऑन-रोड कीमत लगभग 70 लाख रुपये है। पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को साधारण सेडान कारें दी जाती हैं, तो लोकपाल के अध्यक्ष और उनके छह सदस्यों को बीएमडब्ल्यू कारों की क्या आवश्यकता है।

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, इन कारों को खरीदने के लिए सार्वजनिक धन क्यों खर्च किया जा रहा है? मुझे उम्मीद है कि लोकपाल के कम से कम एक या दो सदस्यों ने इन कारों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया होगा, या करेंगे। सिंघवी ने कहा कि उन्होंने लोकपाल पर संसदीय समिति की अध्यक्षता की थी और उनके पिता, पूर्व सांसद डॉ. एलएम सिंघवी ने 1960 के दशक में लोकपाल के विचार की कल्पना की थी।2 उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, इस भ्रष्टाचार-रोधी निकाय को अब अपने सदस्यों के लिए बीएमडब्ल्यू ऑर्डर करते देखना एक दुखद विडंबना है; ईमानदारी के पहरेदार वैधता पर विलासिता का पीछा कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने बताया कि लोकपाल को 2019 में अपनी स्थापना के बाद से 8,703 शिकायतें मिली हैं, लेकिन इनसे केवल 24 जांचें और 6 अभियोजन की मंजूरी मिली है।3 लोकपाल के अध्यक्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएम खानविलकर हैं, और सदस्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सहित सेवानिवृत्त नौकरशाह शामिल हैं।

हाल ही में लोकपाल द्वारा इसकी निविदा की सूचना सार्वजनिक होने के बाद अनेक सामाजिक संगठनों ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है तथा कहा है कि यह दरअसल जनता के पैसे का खुला दुरुपयोग है। सरकार विरोधी संगठनों ने यह भी कहा है कि दरअसल सरकार के खिलाफ जांच को अभियोजना स्वीकृति नहीं देने के एवज में ही ऐसा किया जा रहा है। यह तब किया जा रहा है जबकि देश की अधिसंख्य जनता भीषण गरीबी से जूझ रही है।