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भीषण बाढ़ से प्रभावित पंजाब में मान सरकार की पहल

गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने पंजाब के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, लेकिन इस संकट की घड़ी में पंजाब की मान सरकार ने एक परिवार की तरह लोगों का साथ दिया है। सरकार ने न केवल राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराईं, बल्कि विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और देखभाल पर भी ध्यान केंद्रित किया है। इस मुश्किल समय में सरकार की महिला-केंद्रित पहलें सराहनीय रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग भी इस आपदा से निपटने में सबसे आगे रहा है। 11,103 से अधिक आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवाइयां पहुँचा रही हैं और जल-जनित बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ा रही हैं। वे गर्भवती महिलाओं की निगरानी कर रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के जारी रहे।

सरकार ने राहत कार्यों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दी है। गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए 458 रैपिड रिस्पांस टीमें, 360 मोबाइल मेडिकल यूनिट, और 424 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। बाढ़ से घिरे इलाकों में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित निकालने और प्रसव कराने के लिए बोट एम्बुलेंस की सुविधा भी दी गई है।

इसके अलावा, कई स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए, जहाँ गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच और दवाएं उपलब्ध कराई गईं। गुरदासपुर में तो अधिकारियों ने आपातकालीन स्थिति के लिए एक हेलीकॉप्टर भी तैयार रखा था, जिसका उपयोग गर्भवती महिलाओं सहित गंभीर रूप से बीमार मरीजों को निकालने में किया गया। इन प्रयासों से आठ गर्भवती महिलाओं को बचाया गया, जिनमें से एक ने तो बोट पर ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमों ने बचाव कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सतलुज नदी के पास भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बाढ़ प्रभावित गाँवों में, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभरा।

सिविल सर्जन डॉ राजविंदर कौर ने बताया कि पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने विभाग को गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और उनके सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों का पालन करते हुए, विभाग ने टेंडी वाला से मंजीत कौर और कालू वाला से मनप्रीत कौर को सफलतापूर्वक बचाया और उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उन्होंने सुरक्षित रूप से बच्चों को जन्म दिया। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा भी निःशुल्क कर दी गई।

इस कठिन समय में, स्वास्थ्य विभाग ने न केवल चिकित्सा सहायता प्रदान की है बल्कि प्रभावित परिवारों का मनोबल भी बढ़ाया है। सरकार की ये पहलें दर्शाती हैं कि उन्होंने महिलाओं की बुनियादी ज़रूरतों और स्वास्थ्य सुरक्षा को इस आपदा में भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जो इस तरह के संकट के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतलुज नदी के पास के गाँवों में चिन्हित 45 गर्भवती महिलाओं में से, पिछले सप्ताह चार महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया, जिनमें से तीन सरकारी अस्पतालों में और एक निजी अस्पताल में हुआ।