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कार्यशाला में अंतिम कतार में बैठे नरेंद्र मोदी

उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले भाजपा की जोर आजमाइश

  • प्रधानमंत्री की सादगी: एक मजबूत संदेश

  • कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य और चर्चाएँ

  • जीएसटी सुधार और विपक्ष पर पलटवार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय जनता पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर अपने सांसदों के लिए एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह आयोजन न केवल आगामी चुनाव के लिए एक रणनीतिक मंच साबित हुआ, बल्कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सादगी और पार्टी के भीतर उनके सहज व्यवहार का भी एक अनूठा पहलू सामने आया। कार्यशाला की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर पीएम मोदी का सबसे पीछे की कतार में एक आम सांसद की तरह बैठना थी, जिसने तुरंत सबका ध्यान खींचा और उनकी विनम्रता की चर्चा को हवा दी।

गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर ने इस घटना को उजागर किया। इस तस्वीर में, देश के प्रधानमंत्री होने के बावजूद, मोदीजी पीछे की बेंच पर शांति से बैठे हुए थे, जबकि अन्य सांसद आगे बैठे थे। यह दृश्य भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच उनकी समानता और एक सामूहिक नेतृत्व की भावना को दर्शाता है।

यह कोई पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह का व्यवहार प्रदर्शित किया हो। उनका यह अंदाज यह संदेश देता है कि पार्टी के भीतर पद या प्रतिष्ठा से ज्यादा संगठन और सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं। यह उनकी नेतृत्व शैली का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो उन्हें पार्टी के प्रत्येक सदस्य के करीब लाता है।

यह कार्यशाला सिर्फ उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य पार्टी के सांसदों को उनके विधायी कौशल, शासन रणनीतियों और प्रभावी राजनीतिक संचार के तरीकों पर प्रशिक्षित करना भी था। पार्टी के भीतर इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन भाजपा की संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है।

जैसा कि भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने बताया, ये कार्यशालाएँ एक प्रकार के रिफ्रेशर कोर्स की तरह काम करती हैं, जहाँ सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में उनकी जिम्मेदारियों, विकास कार्यों और जनता के साथ संपर्क स्थापित करने के तरीकों पर गहन चर्चा करने का मौका मिलता है। यह सांसदों को न केवल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों से अवगत कराता है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर काम करने के लिए व्यावहारिक पहलुओं पर भी मार्गदर्शन देता है।

कार्यशाला में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें से एक था हाल ही में किए गए जीएसटी सुधार। सांसदों ने सर्वसम्मति से जीएसटी सुधार के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी। जगदंबिका पाल ने इस सुधार को एक दूरदर्शी कदम बताया, जो अंतर्राष्ट्रीय टैरिफ दबावों का एक प्रभावी विकल्प है। यह चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसने सरकार की आर्थिक नीतियों की सफलता पर जोर दिया।

इसके साथ ही, कार्यशाला में विपक्ष के रुख पर भी निशाना साधा गया। जगदंबिका पाल ने विपक्ष के उन पुराने बयानों का जिक्र किया, जब वे जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहते थे। उन्होंने कहा कि अब जब जीएसटी ने सकारात्मक परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं, तो वही विपक्षी दल इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। यह बयान पार्टी की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसके तहत वे सरकार की उपलब्धियों को मजबूती से पेश करना और विपक्ष के पुराने बयानों की विसंगतियों को उजागर करना चाहते हैं।

दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन, सांसदों ने पूरे दिन विभिन्न सत्रों में भाग लिया, जहाँ उन्हें आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव से संबंधित बारीकियों के बारे में जानकारी दी गई। दूसरे दिन, सोमवार को, एक और तीन घंटे का सत्र आयोजित होना था, जिसके बाद सभी सांसद प्रधानमंत्री मोदी के साथ रात्रिभोज में शामिल होंगे, जिसके बारे में पहले यह सूचना आयी थी कि इसे रद्द कर दिया गया है। यह कार्यशाला और उसके बाद की रात्रिभोज बैठक सीधे तौर पर 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों से जुड़ी हुई है। इन आयोजनों के माध्यम से भाजपा न केवल अपने सांसदों को एकमत करने की कोशिश कर रही है।