विशेषज्ञों ने उत्तरकाशी आपदा पर सरकार को दोषी ठहराया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः उत्तराखंड में फिर आपदा। उत्तरकाशी में बादल फटा। मंगलवार तड़के करीब 2 बजे क्षीरगंगा नदी में बादल फटा। हरपा जलप्रलय का जो वीडियो सामने आया है, उसमें मिट्टी की एक विशाल धारा बहती हुई दिखाई दे रही है। पल भर में सब कुछ उस मिट्टी की धारा में समा गया। सेना का कैंप मिट्टी में दब गया।
कई होटल और होम स्टे मिट्टी में समा गए। उत्तरकाशी में आई इस आपदा में लापता जवानों समेत कम से कम 109 सैनिक लापता हो गए। लोगों से भरी कारें खिलौनों की तरह बह गईं! क्षीरगंगा में आई भीषण आक्समिक जलप्रलय में पूरा कल्प केदार मिट्टी में समा गया है। अब तक आदि शंकराचार्य की स्मृति से जुड़ा कल्प केदार का शिखर ही दिखाई दे रहा था। अब वह भी गहराई में विलीन हो गया है।
विशेषज्ञों ने इस आपदा के लिए बार-बार सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है। विशेषज्ञों ने विस्फोटक आरोप लगाए हैं कि लंबी चर्चा के बावजूद किसी योजना पर अमल नहीं हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरकाशी और धराली जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली पर चर्चा हुई थी। इस पर एक उच्च-स्तरीय बैठक भी हुई थी। लेकिन फिर इसे लागू नहीं किया गया। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-संचालित पूर्व चेतावनी प्रणाली या नाउकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से, उपग्रह चित्रों के विश्लेषण, बिजली, बारिश, जलाशयों, नदी के प्रवाह जैसी सभी जानकारियों के रडार इनपुट के आधार पर, बादल फटने वाली बारिश का 1 से 3 घंटे पहले पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
इसके साथ साथ हिमालय क्षेत्र की कमजोर मिट्टी और काफी ऊंचाई पर जगह जगह बन आये ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर भी निरंतर निगरानी की पहले से हिदायत दी जाती रही है। इस बार भी वहां सिर्फ बादल फटने की घटना नहीं हुई है बल्कि ऊपर का एक अथवा दो ऐसा ग्लेशियर झील भी अत्यधिक पानी के दबाव में फट गया था। इसी वजह से इतना सारा मलबा, पत्थर, कीचड़ भी पानी के साथ इतनी तेज गति से नीचे आया, जिससे पूरा इलाका ही दब गया है।