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जर्मन चांसलर ने सावरमती आश्रम का भी दौरा किया

मोदी के साथ आपसी संबंधों पर चर्चा की

  • दोनों देश आर्थिक तौर पर अगली कतार में

  • पहली बार एशियाई देश की यात्रा पर हैं

  • यहां से बेंगलुरु के दौरे पर जाएंगे मर्ज

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की वर्तमान भारत यात्रा वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते समीकरणों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है। सोमवार से शुरू हुई यह दो दिवसीय यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से है, बल्कि यह दुनिया की तीसरी (जर्मनी) और पांचवीं (भारत) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक सुदृढ़ आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के प्रसिद्ध सावरमती आश्रम का भी दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ किया।

कूटनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व चांसलर मर्ज़ के रूप में पिछले वर्ष मई में पदभार ग्रहण करने के बाद, यह उनकी पहली एशियाई देश की यात्रा है। चांसलर द्वारा अपने पहले एशियाई गंतव्य के रूप में भारत को चुनना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बर्लिन की दृष्टि में नई दिल्ली एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार है। वर्तमान में जब दुनिया अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और एक अशांत विश्व व्यवस्था का सामना कर रही है, तब भारत और जर्मनी का साथ आना वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक माना जा रहा है। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन से ठीक दो सप्ताह पहले हो रही है, जहाँ दोनों पक्ष लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर निर्णायक प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं।

अहमदाबाद में आत्मीय स्वागत और सांस्कृतिक जुड़ाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चांसलर मर्ज़ की मेजबानी अपने गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद में की। कूटनीति के साथ सांस्कृतिक संबंधों को जोड़ते हुए, दोनों नेताओं ने प्रसिद्ध साबरमती आश्रम का दौरा किया। यहाँ उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त, दोनों नेताओं ने पारंपरिक पतंग उत्सव में भी भाग लिया, जो आपसी सौहार्द और जन-जुड़ाव को प्रदर्शित करता है।

रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में ठोस प्रगति द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को आपसी विश्वास और साझा विजन का प्रमाण बताया। उन्होंने रक्षा व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चांसलर मर्ज़ के प्रयासों की सराहना की। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए, दोनों देशों ने भारत-जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा की है। यह केंद्र नवाचार और हरित ऊर्जा समाधानों के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

आर्थिक उपलब्धियां और भविष्य का रोडमैप वर्ष 2026 भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का वर्ष है। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि पिछले साल दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए हैं। वर्तमान में भारत-जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है, जो 50 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। अहमदाबाद के बाद, चांसलर मर्ज़ भारत के तकनीकी केंद्र बेंगलुरु का दौरा करेंगे, जहाँ उनका ध्यान मुख्य रूप से डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और कुशल श्रम गतिशीलता पर केंद्रित रहेगा। यह यात्रा स्पष्ट करती है कि भारत और जर्मनी न केवल व्यापारिक भागीदार हैं, बल्कि वे एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए भी प्रतिबद्ध हैं जो बहुपक्षवाद और नियम-आधारित व्यापार पर टिकी हो।