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जुताई की तैयारी में ही बेशकीमती हीरा मिला

मौसम की पहली ही बारिश में खुल गयी किसान की लॉटरी

  • पहले भी कई लोगों को मिला है हीरा

  • आस पास के लोग भी इस काम में जुटे

  • सिर्फ इसी मौसम में अचानक ही मिलते हैं

राष्ट्रीय खबर

 

हैदराबादः मौसम की पहली बारिश में जमीन से निकले लाखों रुपये के हीरे। आंघ्रप्रदेश में हीरा चुनने का काम तेजी पर है। मानसून से पहले की बारिश किसान और उसकी फसलों के लिए सौभाग्य लेकर आती है। खासकर कृषि पर निर्भर देश में मानसून से पहले की बारिश को फसलों के लिए वरदान माना जाता है। कुरनूल के एक गांव में एक किसान की किस्मत आसमान से बरसी मूसलाधार बारिश ने पल भर में बदल दी।

खेत में काम करते समय किसान के परिवार की किस्मत पल भर में बदल गई। गीली मिट्टी हटाकर उसे लाखों की संपत्ति मिली। पत्थर के एक बेशकीमती टुकड़े ने किसान की किस्मत बदल दी। जब वह खेत में खुदाई कर रहा था, तभी एक कठोर पत्थर का टुकड़ा उसके पैर से टकराया। वह लड़खड़ा कर गिर पड़ा। जब उसने पत्थर का टुकड़ा उठाकर एक स्थानीय रत्न व्यापारी को दिखाया, तो वह भी हैरान रह गया खेती करते समय कीमती रत्न मिलने की खबर आसपास के इलाकों में जंगल की आग की तरह फैल गई।

कुबेर के धन पर हाथ डालने की उम्मीद में आसपास के विभिन्न इलाकों से लोग रातों-रात तुग्गली इलाके में जुटने लगे। तुग्गली मंडल क्षेत्र के कुख्यात किसान को लाखों रुपये मिलने के बाद, दिहाड़ी मजदूर और पड़ोसी क्षेत्र के किसान हीरे की उम्मीद कर रहे हैं। वे अलग-अलग खेतों में कीमती पत्थरों की खोज कर रहे हैं।

तुग्गली मंडल का जोनागिरी गांव एक ऐसा इलाका है, जहां मानसून के मौसम में हीरे मिलने की पूर्व मिसालें हैं। यहां के कई किसानों को खेती के लिए खुदाई करते समय मिट्टी के नीचे से हीरे मिले हैं। मानसून शुरू होते ही हीरे खोजने की प्रतियोगिता शुरू हो जाती है। जब गर्मियों में उबड़-खाबड़ जमीन पर भारी बारिश होती है, तो नरम मिट्टी हट जाती है और हीरे सहित विभिन्न कीमती रत्न बाहर आ जाते हैं।

हीरे मुख्य रूप से आंध्र के अनंतपुर और कुरनूल जिलों के बीच के इलाके में पाए जाते हैं। पुरस्कार भी नकद दिए जाते हैं।रिपोर्टों के अनुसार, 2021 में, तीन लोगों को जोनागिरी गांव में कुल 2.4 करोड़ रुपये के हीरे मिले। इससे पहले 2019 में एक किसान को 60 लाख रुपये के हीरे मिले थे। 2020 में आंध्र के दो निवासियों को भी ये हीरे मिले थे। हीरों की असली कीमत न समझ पाने के कारण उन्हें मजबूरन इन्हें व्यापारियों को काफी कम कीमत पर बेचना पड़ा। हालांकि दोनों की कीमत 5 और 6 लाख रुपये थी, लेकिन उन्होंने इन्हें कुल 1.5 लाख और 50 हजार रुपये में बेचा।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि गांव के कई लोग अपने पूरे परिवार के साथ खेतों में हीरे खोजने में लगे हैं। वे दिन का ज्यादातर समय खेतों में बिताते हैं। किशोर भी अपने परिवार के साथ रत्न खोजने में लगे हैं। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को भी साथ ला रहे हैं। वे खाने-पीने का सामान और अन्य सामान भी ले जाते हैं। 2022 में हीरा मिलने पर एक किसान के हाथ 40 लाख रुपये की मोटी रकम लगी। 30 कैरेट के हीरा मेले में एक और किसान को 1 करोड़ 4 लाख रुपये मिले। कई लोगों को लगता है कि आंध्र के एक अन्य क्षेत्र रायलसीमा में कीमती रत्न मिलना स्वाभाविक है।

मध्य युग में विजयनगर साम्राज्य के उत्कर्ष काल में रायलसीमा हीरे और आभूषणों के लिए प्रसिद्ध थी। कीमती रत्नों की खरीद-फरोख्त का तरीका बदल गया है। हालांकि, दशकों से कुरनूल जिले के तुग्गली, जोनागिरी, मद्दिकेरा और अनंतपुर के बजराकारू के निवासी बारिश के मौसम में खेतों में घूम-घूम कर हीरे की फसल काटते रहे हैं। आंध्र के पर्यटन व्यवसायी भी हीरे की खोज के मौसम का लाभ उठाते हैं। क्योंकि, हीरे के आकर्षण के कारण कई लोग बारिश के मौसम में इन क्षेत्रों में अपना ठिकाना बना लेते हैं। स्थानीय लोगों के अलावा पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और तेलंगाना से भी कई लोग यहां आते हैं।