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संगम स्नान के भगदड़ में चालीस की मौत का अंदेशा

तमाम तैयारियों का पुख्ता दावा असली परीक्षण में फेल

  • तट पर सो रहे लोगों को रौंदा

  • जिला की सीमाओं को सील किया गया

  • मेला क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड भी तैनात

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः महाकुंभ नगर में मौनी अमावस्या पर उमड़ी भीड़ की वजह से भगदड़ मची। जिसके बाद मुर्दाघरों में करीब चालीस शव लाने की अपुष्ट जानकारी है। सरकारी अधिकारी औपचारिक तौर पर किसी की मौत नहीं होने की बात कह रहे हैं जबकि मरने वालों मे से कुछ लोगों की पहचान भी सामने आ चुकी है।

मौनी अमावस्या के अवसर पर नदी में डुबकी लगाने के लिए जाते समय भगदड़ में घायल हुई एक महिला और उसकी बेटी ने बुधवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मौनी अमावस्या के अवसर पर पवित्र स्नान के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आए थे, जिसके कारण भगदड़ मच गई और कई लोग घायल हो गए। इसके साथ ही पवित्र महाकुंभ में हर किस्म के पुख्ता इंतजाम का दावा भी हवा हवाई साबित हो गया क्योंकि भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जा सका। भगदड़ में घायल हुए लोगों को भी अस्पताल पहुंचाने की सरकारी तैयारी विफल साबित हुई जबकि वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने यह जिम्मेदारी निभायी।

मीडिया को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन भीड़ का दबाव बना हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से संगम नोज पर जाने के बजाय नजदीकी घाटों पर डुबकी लगाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अफवाहों पर विश्वास न करने का भी आग्रह किया। उत्तर प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि एक दिन में ही महाकुंभ में 10 करोड़ तीर्थयात्री आएंगे और अमृत स्नान की तैयारी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

संगम में उमड़ रही भारी भीड़ को देखते हुये एहतियात के तौर पर प्रयागराज से सटे लगभग सभी जिलों की सीमाओं को अस्थायी तौर पर सील कर दिया गया है ताकि मेला क्षेत्र और नगर में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। सूत्रों ने बताया कि प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में प्रवश करने से रोकने को कहा गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने संगम तट पर मोर्चा संभाल लिया है। संगम तट पर केवल साधु-संतो को जाने की इजाजत है। श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए गंगा पर बने सभी पीपा पुलों को बंद कर दिया गया है।

त्रिवेणी में डुबकी लगाने के साथ अखाड़ों में साधु संतों के दर्शन की आस लिये संगम तट पर सो रहे श्रद्धालुओं को मंगलवार देर रात बैरीकेडिंग तोड़ कर आयी भीड़ ने रौंद दिया। इस हादसे में बाल बाल सकुशल बचे श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र से निकलने के दौरान यह वृतांत सुनाया। संगम क्षेत्र में इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी कोलकाता से आई कृष्णा प्रसाद ने बताया कि संगम तट पर लोग सुबह होने की प्रतीक्षा में लेटे थे। तभी लोगों की भीड़ अखाड़ों के अमृत स्रान के लिए बने बैरिकेट को तोड़ते हुए घाट की तरफ बढ़ी और घाट पर लेटे श्रद्धालु भीड़ की चपेट में आ गए।

बरेली से आई पूर्व शिक्षिका सुमन सिंह ने कहा,  भाग्य भाग्य की बात है, ऐसा अवसर सभी को नहीं मिलता। इसीलिए हम गंगा माइया में स्रान करने पहुंची हूं। ऐसी अनहोनी की किसी ने कल्पना तक नहीं किया था , लगत है गंगा मइया को यही मंजूर था। यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है। पता नहीं किसकी गलती की सजा इन लोगों को मिली।

जयपुर के बाडमेर निवसी सज्जन पुरखोलिया ने सेक्टर दो में बने मीडिया शिविर के सामने से जाते समय बातचीत में बताया कि 144 साल बाद यह पुण्य स्रान का अवसर है जिसे कोई भी गंवाना नहीं चाहता। यही वजह है कि देश दुनिया से लोग संगम के किनारे खुले आसमान के नीचे डेरा डालकर पड़े थे। तभी बैरिकेड तोड़कर आए जनसैलाब के नीचे वे दब गए। यह हमारा सौभाग्य था कि हम और हमारे साथ आए पांच लोग किसी तरह बच गए। उन्होंने कहा,  अखाड़ों के नागा सन्यासियों का दर्शन करने की अभिलाषा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर डटे रहे। मुझे लगता है कि बहुत भाग्यशाली हैं वे लोग जो गंगा के तट पर आकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।