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शीतला देवी धाम कड़ा में सजा माता का दरबार

कौशांबी : देश की 51 शक्तिपीठों में शामिल शीतला देवी धाम कड़ा में नवरात्र के दौरान पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभाावना है। शीतला देवी धाम कड़ा अनादिकाल से शक्ति उपासको के आस्था का केंद्र रहा है। पूरे साल देश भार से श्रद्धालु मां शीतला देवी के दर्शनार्थ कड़ा धाम आते रहते हैं। वर्ष में दो बार नवरात्र के अवसर पर तो यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है ।

इस बार चैत्र नवरात्र की शुरुआत 22 मार्च से हो रही है। नवरात्र मेला की तैयारियां जोरों पर चल रही है। बसंत के नवरात्र मेला में देश भार से इस बार पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभाावना जताई जा रही है। चैत्र शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि मां शीतला देवी की उद्भव तिथि मानी जाती हैं इसीलिए देवी अस्थान में सप्तमी और अष्टमी का विशाल मेला लगता है।

पतित पावनी गंगा के तट पर स्थित शीतला देवी धाम शक्तिपीठ का विशेष महत्व है स्कंद पुराण के अनुसार भागवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से काटा गया शिवप्रिया सती का एक हाथ जिस स्थान पर गिरा था वही देवी मंदिर केी स्थापना कर दी गई जो स्थान कालांतर में ,करा, जो बाद में अपभा्रंश होकर कड़ा नाम से प्रसिद्ध हो गया।

वर्तमान में मां शीतला देवी का मंदिर भाव्य रूप धारण कर रहा है। किंवदंती है कि द्वापर युग में अपने वनवास की अवधि में पांडू पुत्र युधिष्ठिर ने जिस स्थान पर सती का कर (हाथ) गिरा था, एक मंदिर का निर्माण कराया था। जिसे शीतला देवी धाम के नाम से जाना गया शीतला देवी धाम कड़ा शक्तिपीठ के स्थापना से लेकर ही देवी उपासको का विश्वास है कि मां शीतला देवी के दर्शन व पूजा-अर्चना से न केवल पूण्य फल प्राप्त होता है। बल्कि सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिल जाता है ।

धन,ऐश्श्वर निरोगी होने के सुख के साथ दंपत्ति संतान सुख की प्राप्त होती है। मान्यता है कि नवरात्र के अवसर पर देवी धाम पर बच्चों का मुंडन कराने पर नौनिहाल दीर्घ जीवी व निरोगी होते हैं ।इसी मान्यता के चलते देश भार से नवरात्र के अवसर पर दंपति अपने बच्चों को यहां लाकर मुंडन कराते हैं और देवी मंदिर में पहुंचकर माथा टेकतेहै।

दान दक्षिणा देते हैं। देवी मंदिर में मां शीतला के प्रतिमा के पास एक जलकुंड जिसे जलहरी कहते हैं। मन्नत पूरी होने पर गंगाजल एवं दूध सेजल हरी भारकर मां की कृपा प्राप्त करते है। नव दंपत्ति जलहरी भारकर सुखी जीवन जीने की देवी मां से याचना करते हैं । जल हरि के जल की चमत्कारिकता के किस्से अभी भी कड़ा के आसपास गुंजायमान है।

यह जल रोगी के ऊपर छिड़कने से चेचक की बीमारी ठीक हो जाती है गंभीर बीमारी से लेकर प्रेत बाधाए भी नियमित जलहरी के जल रोगी के ऊपर छिड़क कर ठीक किया जाता है। असाध्य रोगों से निजात पाने एवं संतान प्राप्ति हुआ दरिद्रता तथा अनेक महा पापों से मुक्त के लिए श्रद्धालु देवी धाम की परिक्रमा की मान्यता अभी भी जीवंत बनी हुई है।

दूरस्थ भाागों से आस्थावान लोग लेट लेट कर कडाधाम पहुंचकर मां शीतला मंदिर की परिक्रमा करते हैं दर्शन पूजन और मन्नतें करते हैं। देवी दर्शन के लिए आसपास के जिले प्रयागराज, भादोही ,वाराणसी, मिर्जापुर ,प्रतापगढ़ चित्रकूट बांदा हमीरपुर फतेहपुर कानपुर, बाराबंकी, लखनऊ आदि जिलों से श्रद्धालु झुंड बनाकर सजा पता का निशान लेकर पैदल देवी गीत गाते हुए ध्वज पताका झंडा एवं निशान देवी मां के गीत गाते हुए जयकारा लगाते हैं।

कड़ा धाम पहुंचते और देवी के चरणों में अपना आस्था का प्रतीक ध्वज पताका चढ़ाकर देवी दर्शन कर मनोवांछित फल की कामना करते हैं। दर्शनार्थी कड़ा धाम पहुंचकर पहले गंगा में डुबकी लगाते हैं गंगा की पूजा आरती के बाद गंगाजल लेकर देवी मंदिर में पहुंचते हैं।